Bikaner-Kotputli Expressway: बीकानेर से दिल्ली-नोएडा का सफर अब महज़ 10 से 11 घंटे का नहीं, बल्कि झटपट सिर्फ 6 घंटे का रह जाएगा! जी हाँ, राजस्थान का बहुप्रतीक्षित ‘बीकानेर-कोटपूतली ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे’ एनसीआर (NCR) की कनेक्टिविटी में एक क्रांतिकारी बदलाव लाने के लिए पूरी तरह तैयार है। राज्य के बजट में प्रस्तावित इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट की डीपीआर (DPR) पर तेजी से काम चल रहा है, जिसके पूरा होते ही धरातल पर काम शुरू हो जाएगा। इस शानदार हाईवे का मुख्य मकसद बीकानेर संभाग को सीधे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से जोड़ना है, जिससे राजस्थान के दूर-दराज के ग्रामीण इलाके भी हरियाणा के रास्ते सीधे दिल्ली से जुड़ जाएंगे।
बीकानेर से दिल्ली-नोएडा का सफर होगा सुपरफास्ट और आसान
अभी तक बीकानेर से दिल्ली-नोएडा जाने के लिए यात्रियों को फतेहपुर और रोहतक के पुराने राजमार्गों से होकर गुजरना पड़ता था। भारी ट्रैफिक जाम और सिंगल-लेन की वजह से 440 से 470 किलोमीटर की यह दूरी तय करने में पूरे 10-11 घंटे बर्बाद हो जाते थे। लेकिन इस नए एक्सप्रेसवे के बनते ही दूरी सीधे 50 किलोमीटर कम हो जाएगी। कोटपूतली पहुँचने के बाद अब आप बिना किसी झंझट के सीधे दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे या KMP एक्सप्रेसवे के जरिए दिल्ली-नोएडा में प्रवेश कर सकेंगे। यह एक अत्याधुनिक 6-लेन हाईवे होगा, जिस पर गाड़ियाँ 120 किमी प्रति घंटे की सरपट रफ्तार से दौड़ सकेंगी। यही वजह है कि बीकानेर से दिल्ली का सफर अब सिर्फ 6 घंटे में सिमट जाएगा। वहीं, बीकानेर से कोटपूतली की मौजूदा 340 किमी की दूरी (जो तय करने में 6 घंटे लगते थे) घटकर अब मात्र 295 किमी रह जाएगी और सफर सिर्फ 3 घंटे में पूरा होगा।
295 KM मेगा हाईवे का शानदार रूट मैप
चूँकि यह पूरी तरह से एक ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे होगा, इसलिए आपको किसी भी शहर के बीच के ट्रैफिक में फंसने की कोई चिंता नहीं होगी। यह मेगा प्रोजेक्ट राजस्थान के कुल 5 जिलों को आपस में जोड़ेगा।
रूट: बीकानेर (जयपुर बाईपास से शुरू) -> लक्ष्मणगढ़ -> रींगस -> खंडेला-पाटन (नीमकाथाना) -> कोटपूतली (पनियाला में समाप्त)।
यह हाईवे सीकर, नीमकाथाना और फतेहपुर जैसे व्यस्त शहरों के ट्रैफिक से कोसों दूर से निकलेगा।
बीकानेर से दिल्ली-नोएडा का नया रूट: बीकानेर -> कोटपूतली -> दिल्ली-जयपुर हाईवे -> गुरुग्राम -> नई दिल्ली -> नोएडा।
NHAI तैयार कर रहा है DPR, रफ्तार पकड़ेगा काम
शुरुआत में इस प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी राजस्थान सरकार के पास थी, लेकिन वित्तीय और तकनीकी वजहों से अब इसे भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को सौंप दिया गया है। फिलहाल NHAI इसकी विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार कर रहा है, जिसके लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। सीकर और नीमकाथाना जिलों में जमीन अधिग्रहण का काम भी आरंभ हो गया है। सरकार और NHAI की इस संयुक्त योजना के तहत इस मेगा एक्सप्रेसवे को साल 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
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