जालंधर में ग्रेनेड हमले से सामने आया पाकिस्तान में बैठे शहजाद भट्टी का कथित नेटवर्क अब जांच एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती है। सोशल मीडिया के जरिए युवाओं से संपर्क, छोटे कामों के बदले पैसे और फिर हमलों तक पहुंचाने के आरोपों ने सीमा पार साजिश के नए तरीके पर सवाल खड़े किए हैं।
जालंधर हमले से खुली नेटवर्क की परत
16 मार्च 2025 की सुबह जालंधर में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और यूट्यूबर नवदीप सिंह संधू के घर की बालकनी में ग्रेनेड फेंके जाने की घटना ने पंजाब में सनसनी फैला दी थी। पंजाब पुलिस और NIA ने मामले में हार्दिक कंबोज नाम के युवक को पकड़ा। इसके बाद पाकिस्तान में बैठे गैंगस्टर से आतंकी बने शहजाद भट्टी की कथित भूमिका जांच के केंद्र में आई।
सोशल मीडिया बना भर्ती का जरिया
जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, भट्टी का कथित नेटवर्क पारंपरिक तरीके के बजाय सोशल मीडिया के सहारे भारत में युवाओं तक पहुंचने की कोशिश करता था। हथियारों या आपराधिक गतिविधियों से जुड़ी ऑनलाइन सामग्री देखने वाले युवाओं को बातचीत के जरिए संपर्क में लाया जाता, फिर धीरे-धीरे उन्हें छोटे काम सौंपे जाने का दावा है।
आरोप है कि शुरुआत में पैसों का लालच दिया जाता और बाद में युवाओं को रेकी या अन्य आपराधिक गतिविधियों में इस्तेमाल किया जाता।
छोटे काम, बड़ी साजिश
जांच एजेंसियों के मुताबिक, कथित नेटवर्क में काम कई स्तरों में बांटा गया था। स्थानीय युवाओं से सिम और निगरानी उपकरणों की व्यवस्था कराने से लेकर टारगेट की रेकी और हमले की तैयारी तक अलग-अलग जिम्मेदारियां दी जाती थीं।
बताया गया है कि इन कामों के लिए युवाओं को अपेक्षाकृत छोटी रकम मिलती थी। यही तरीका जांच एजेंसियों के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि आर्थिक रूप से कमजोर या नशे की समस्या से जूझ रहे युवाओं को आसानी से निशाना बनाए जाने की आशंका रहती है।
तीन घटनाओं में दिखा एक जैसा पैटर्न
जालंधर में हमला, सिरसा के महिला थाने पर कथित हमला और अंबाला में कार ब्लास्ट जैसे मामलों की जांच में एजेंसियों ने सोशल मीडिया संपर्क, स्थानीय युवाओं की भर्ती और रेकी जैसे समान पैटर्न की पड़ताल की।
जून 2026 में NIA की पंजाब और हरियाणा के कई जिलों में कार्रवाई के दौरान डिजिटल डिवाइस और अन्य सामग्री की जांच भी की गई। जांच एजेंसियां इन मामलों में पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स की कथित भूमिका को जोड़कर देख रही हैं।
भारत में नेटवर्क खत्म करने का दावा
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 17 अगस्त को भारत में शहजाद भट्टी के नेटवर्क को खत्म करने का दावा किया। सुरक्षा एजेंसियों ने विभिन्न राज्यों में कार्रवाई कर कई संदिग्धों को गिरफ्तार या हिरासत में लेने की जानकारी दी है।
फिर भी सबसे बड़ी चुनौती सीमा पार बैठे कथित हैंडलर्स तक पहुंचने की है। सोशल मीडिया अकाउंट बदलकर दोबारा सक्रिय होने की कोशिशें भी जांच एजेंसियों के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं।
डिजिटल दुनिया से वास्तविक खतरे तक
इस पूरे मामले की सबसे गंभीर तस्वीर यह है कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल सिर्फ प्रचार या संपर्क के लिए नहीं, बल्कि कथित तौर पर युवाओं को धीरे-धीरे आपराधिक नेटवर्क में खींचने के लिए किया जा रहा था।
शहजाद भट्टी से जुड़े कथित नेटवर्क की जांच एक बड़ा सबक देती है—आतंकी साजिशें अब केवल सीमा पार हथियार भेजने तक सीमित नहीं हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म, आर्थिक लालच और स्थानीय नेटवर्क का इस्तेमाल सुरक्षा के लिए नई चुनौती बन रहा है। भारत में नेटवर्क पर कार्रवाई के बाद भी सीमा पार बैठे कथित संचालकों तक पहुंचना निर्णायक कदम होगा।
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