गाजा शांति सम्मेलन: थरूर का सवाल – क्या भारत का ‘रणनीतिक मौन’ अवसर चूक गया?

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रणनीतिक दूरी या मौका चूक गए? शशि थरूर ने गाजा शांति सम्मेलन में पीएम मोदी की अनुपस्थिति पर सवाल उठाए

गाजा शांति शिखर में भारत की ‘मामूली’ उपस्थिति पर थरूर का सवाल: क्या यह रणनीतिक दूरी का संकेत है?

मिस्र के शर्म अल-शेख में आयोजित गाजा शांति शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अनुपस्थिति और भारत के निम्न-स्तरीय प्रतिनिधित्व पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने चिंता जताई है। थरूर का मानना है कि भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह का भेजा जाना एक “छुटा हुआ अवसर” हो सकता है, जो विश्व नेताओं के जमावड़े के विपरीत, भारत की कूटनीतिक उपस्थिति को कमज़ोर कर सकता है।

यह शिखर सम्मेलन, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सहित कई वैश्विक दिग्गज भाग ले रहे हैं, गाजा में शांति बहाली की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी को आमंत्रित किया गया था, लेकिन नई दिल्ली ने मंत्री स्तर पर प्रतिनिधित्व का निर्णय लिया।

‘रणनीतिक संयम या चूका हुआ अवसर?’

थरूर ने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी किसी व्यक्ति पर नहीं, बल्कि भारत के प्रतिनिधित्व के स्तर पर केंद्रित है। उन्होंने कहा, “यह कीर्तिवर्धन सिंह पर कोई टिप्पणी नहीं है, जिनकी योग्यता पर कोई प्रश्न नहीं है। लेकिन उपस्थित दिग्गजों की भीड़ को देखते हुए, भारत के चयन को रणनीतिक दूरी को प्राथमिकता देने के संकेत के रूप में देखा जा सकता है, जो हमारे बयानों से ज़ाहिर नहीं होता।”

क्षेत्रीय स्थिरता और भारत का प्रभाव

भारत की “निचले स्तर की भागीदारी” के कारण पुनर्निर्माण और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर देश के कूटनीतिक प्रभाव में कमी आ सकती है, ऐसी चिंता थरूर ने व्यक्त की। उन्होंने कहा, “एक ऐसे क्षेत्र में जो खुद को नया आकार दे रहा है, हमारी अपेक्षाकृत अनुपस्थिति हैरान करने वाली है।”

संघर्ष की पृष्ठभूमि और मानवीय संकट

यह शिखर सम्मेलन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की गाजा शांति योजना के पहले चरण के लागू होने के बाद हो रहा है, जिससे संघर्ष प्रभावित क्षेत्र में अस्थायी युद्धविराम हुआ है। 7 अक्टूबर, 2023 को हमास द्वारा इज़राइली शहरों पर किए गए हमलों के बाद शुरू हुए इस संघर्ष ने महीनों तक की हिंसा का रूप ले लिया था। इन हमलों में लगभग 1,200 लोग मारे गए थे और 251 बंधक बनाए गए थे, जिनमें से 50 से अधिक अभी भी हमास की कैद में हैं।

गाजा के हमास द्वारा संचालित स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इज़राइली सैन्य अभियानों में 66,000 से अधिक फिलिस्तीनी मारे गए हैं। भोजन और चिकित्सा आपूर्ति की गंभीर कमी के कारण यह क्षेत्र एक भयंकर मानवीय संकट का सामना कर रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने हाल ही में चेतावनी दी थी कि गाजा में कुपोषण की दर “खतरनाक स्तर” पर पहुँच गई है।


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