विशेष रिपोर्ट: अंतर्राष्ट्रीय
oi-भावना पांडे
Sunday, January 18, 2026, 0:04 [IST]
ग्रीनलैंड की जंग: ट्रम्प की धमकी, यूरोप पर टैरिफ की तलवार!
दुनिया एक बार फिर व्यापार युद्ध की आग में झुलसने को तैयार है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की टैरिफ (Tariff) नीति ने एक नया मोड़ ले लिया है। इस बार निशाने पर सिर्फ चीन या मैक्सिको नहीं, बल्कि उनके खुद के यूरोपीय सहयोगी हैं।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प ने बेहद साहसी और विवादास्पद घोषणा की है: यूरोप पर भारी भरकम शुल्क लगाया जाएगा, और यह तब तक जारी रहेगा जब तक अमेरिका को ‘ग्रीनलैंड’ खरीदने की इजाजत नहीं मिल जाती। इसे ट्रम्प के लिए मोलभाव का सबसे बड़ा औत हथियार कहा जा रहा है।
1 फरवरी से बदलेगी तस्वीर
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर ट्रम्प ने साफ कर दिया है कि 1 फरवरी, 2026 से उनका टैरिफ हमला शुरू हो जाएगा। शुरुआत में 10% का ‘झटका’ देने की तैयारी है, जिसका असर डेनमार्क (जिसका ग्रीनलैंड स्वशासी हिस्सा है), नॉर्वे, स्वीडन, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम और नीदरलैंड जैसे देशों पर दिखेगा।
लेकिन यहीं रुकने का ट्रम्प का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ग्रीनलैंड का सौदा नहीं हुआ, तो 1 जून, 2026 से यह टैरिफ बढ़कर 25% हो जाएगा। यह तब तक लागू रहेगा जब तक “अमेरिका ग्रीनलैंड खरीदने का समझौता नहीं कर लेता।”
ट्रम्प की ब्लेड लाजिक: चीन-रूस और डॉगस्लेड
अपने पोस्ट में ट्रम्प ने डेनमार्क और यूरोपीय संघ को ‘मुफ्तखोरी’ के लिए आड़े हाथों लिया। उन्होंने लिखा,
“हमने कई सालों तक डेनमार्क और यूरोप को छूट देकर सब्सिडी दी है। अब सदियों बाद लौटाने का वक्त आ गया है। विश्व शांति दांव पर लगी है!”
ट्रम्प ने अपने दावे दोहराते हुए कहा कि चीन और रूस ग्रीनलैंड पर नजर गड़ाए हुए हैं, लेकिन डेनमार्क इसे रोकने की स्थिति में नहीं है। उन्होंने डेनमार्क की रक्षा क्षमता पर कटाक्ष करते हुए यहां तक टिप्पणी की कि उनके पास केवल “दो डॉगस्लेड” (खिलौना स्लेड) हैं, जिनमें से एक हाल ही में खरीदा गया है।
“विश्व शांति” का दावा
खुद को पूर्ण विराम और तीसरे व्यक्ति में संबोधित करते हुए ट्रम्प ने लिखा,
“केवल संयुक्त राज्य अमेरिका, राष्ट्रपति डोनाल्ड जे. ट्रम्प के नेतृत्व में, ही इस खेल में सफलतापूर्वक टिक सकता है!”
उनके अनुसार, ग्रीनलैंड का अधिग्रहण न सिर्फ अमेरिका बल्कि वैश्विक सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। ट्रम्प ने यूरोपीय देशों की यात्राओं पर भी सवाल उठाए और उन्हें “अज्ञात उद्देश्यों” वाली “बहुत खतरनाक यात्राएं” बताया।
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