भारत: खिलौनों से टैंक तक, स्वदेशी निर्माण की उड़ान

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देश में खिलौने से लेकर टैंक का हो रहा है निर्माण

आतंक पर भारत का करारा जवाब: सर्जिकल स्ट्राइक से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक, देश की सुरक्षा सर्वोपरि

नई दिल्ली: देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक बार फिर आतंकवाद के खिलाफ भारत के अडिग रुख को दोहराया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश की संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। 2016 के सर्जिकल स्ट्राइक, 2019 के बालाकोट एयर स्ट्राइक और हाल ही में हुए ऑपरेशन सिंदूर, ये सभी भारत की इसी दृढ़ संकल्प का प्रमाण हैं। पहलगाम हमले के जवाब में की गई कार्रवाई में आतंकवादियों की पहचान या उनके धार्मिक आधार पर कोई भेद नहीं किया गया, बल्कि देश की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई। यह बातें उन्होंने जैन इंटरनेशनल ट्रेड आर्गेनाइजेशन द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहीं।

जैन विरासत का संरक्षण: राष्ट्र की सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने का संकल्प

रक्षा मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि भारत की बढ़ती सैन्य और आर्थिक शक्ति का उद्देश्य किसी पर प्रभुत्व जमाना नहीं, बल्कि भगवान महावीर के दिखाए मार्ग, आध्यात्मिक परंपराओं और मानवता के मूल्यों की रक्षा करना है। उन्होंने डॉक्टर विक्रम साराभाई, डॉक्टर डीएस कोठारी, डॉक्टर जगदीश चंद्र जैन और डॉक्टर मीनाक्षी जैन जैसी प्रतिष्ठित हस्तियों के योगदान को याद किया, जिन्होंने देश को हमेशा प्रेरित किया है। सरकार जैन विरासत को संरक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिसके तहत विदेशों से चोरी हुई तीर्थंकरों की मूर्तियों को वापस लाया जा रहा है और प्राकृत भाषा को भी मान्यता दी जा रही है। उन्होंने देशवासियों से भगवान महावीर के अहिंसा, सच्चाई और अपरिग्रह के सिद्धांतों को अपनाने की अपील की, ताकि 2047 तक भारत एक विकसित राष्ट्र बन सके।

रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता भारत: ‘मेक इन इंडिया’ की गूंज

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत रक्षा क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति कर रहा है। रक्षा निर्यात में पिछले कुछ वर्षों में जबरदस्त उछाल आया है। 2014 में जहां यह निर्यात 600 करोड़ रुपये था, वहीं अब यह बढ़कर 24000 करोड़ रुपये तक पहुँच गया है। 2029 तक इसके 50000 करोड़ रुपये तक पहुँचने की उम्मीद है। तेजस लड़ाकू विमान, आकाश मिसाइल और अर्जुन टैंक जैसे महत्वपूर्ण रक्षा उपकरण अब भारत में ही निर्मित हो रहे हैं, जिन्हें ‘मेक इन इंडिया’ के तहत भारतीय सेना द्वारा बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को और मजबूत करने के लिए हाल ही में 97 तेजस लड़ाकू विमानों की खरीद का समझौता एचएएल के साथ किया गया है, जिनमें 64% उपकरण स्वदेशी होंगे।

विश्व की ‘फैक्ट्री’ बनने की राह पर भारत: आर्थिक महाशक्ति बनने की ओर अग्रसर

आज भारत खिलौनों से लेकर टैंक तक, हर क्षेत्र में उत्पादन कर रहा है। भारत तेजी से एक वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में उभर रहा है और भविष्य में ‘फैक्ट्री ऑफ द वर्ल्ड’ बनने की क्षमता रखता है। सरकार की दूरदर्शी नीतियों और दृढ़ संकल्प के कारण यह संभव हो पा रहा है। वर्तमान में भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और 2030 तक यह 7.3 ट्रिलियन डॉलर तक पहुँच जाएगी। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की रिपोर्ट के अनुसार, औसत विकास दर को देखते हुए, 2038 तक क्रय शक्ति समता (PPP) के पैमाने पर भारत दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है।

अवेयर मीडिया नेटवर्क


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