भारतीय हितों पर अमेरिकी फैसलों पर संसदीय समिति की चिंता, भारतीय-अमेरिकी समुदाय से मुखर होने की अपील
हाल ही में भारत के खिलाफ अमेरिका द्वारा लिए गए कुछ अप्रत्याशित और प्रतिकूल फैसलों को लेकर भारत की एक संसदीय समिति ने अमेरिकी सांसदों के समक्ष अपनी चिंता व्यक्त की है। यह मुद्दा तब सामने आया जब अमेरिका की डेमोक्रेटिक पार्टी के पांच सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल, जिनमें से कुछ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के मुखर आलोचक रहे हैं, भारत दौरे पर आया।
विदेश मामलों से संबंधित संसद की स्थायी समिति के अध्यक्ष, श्री शशि थरूर, ने बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए बताया कि समिति के सदस्यों ने अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के समक्ष एक महत्वपूर्ण सवाल उठाया। यह सवाल विशेष रूप से भारतीय-अमेरिकी प्रवासी समुदाय द्वारा इन प्रतिकूल फैसलों के प्रति बरती जा रही कथित चुप्पी के बारे में था।
श्री थरूर के अनुसार, इस बैठक में भारतीय-अमेरिकी प्रवासी समुदाय की इस मामले पर चुप्पी को लेकर चर्चा हुई। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय-अमेरिकी समुदाय को इस संवेदनशील मुद्दे पर अपनी आवाज़ उठानी चाहिए। श्री थरूर ने कहा, "हमें सभी को भारतीय-अमेरिकी समुदाय से बात करने की ज़रूरत है और यह बताना चाहिए कि यदि आप अपनी मातृभूमि से अपने संबंधों की परवाह करते हैं, तो आपको इसके लिए लड़ना होगा, बोलना होगा।"
उन्होंने आगे कहा कि भारत के साथ खड़े होने के लिए उन्हें अपने राजनीतिक प्रतिनिधियों पर दबाव बनाना होगा। यह स्पष्ट संदेश है कि देश के हितों की रक्षा में प्रवासी समुदाय की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और उनसे सक्रिय भागीदारी की अपेक्षा की जाती है। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल, जिसका नेतृत्व एमी बेरा ने किया, में कुछ ऐसे सदस्य भी शामिल थे जिनकी जड़ें भारत से जुड़ी हैं, जिससे इस चर्चा को और भी प्रासंगिक बना दिया।
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