सिस्टम की सुस्ती और 15 मौतें: बीजेपी पार्षद ने खोली प्रशासन की पोल
इस दर्दनाक हादसे ने सरकारी तंत्र की संवेदनहीनता को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है। वार्ड-11 के बीजेपी पार्षद कमल वाघेला ने एबीपी न्यूज से बातचीत में एक ऐसा खुलासा किया है, जो रोंगटे खड़े कर देने वाला है। उन्होंने बताया कि दूषित पानी के कारण अब तक 15 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, जबकि एक मरीज की स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है। विडंबना देखिए कि 8 दिन बीत जाने के बाद भी प्रशासन यह पता लगाने में नाकाम रहा है कि आखिर लीकेज कहां से हो रहा है। वाघेला ने सीधे तौर पर इस मौत के तांडव के लिए ‘सिस्टम’ की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है।
पार्षद के आरोपों ने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। उन्होंने दावा किया कि वे लगातार लिखित शिकायतें देते रहे, लेकिन अफसरों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। मामला इतना गंभीर था कि उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव को भी पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की थी। दस्तावेजों के अनुसार, नर्मदा की नई पाइपलाइन की फाइल 12 नवंबर 2024 को ही तैयार हो गई थी, लेकिन अफसरों ने इसे 7 महीनों तक ठंडे बस्ते में दबाए रखा। भारी दबाव के बाद 30 जुलाई को टेंडर तो जारी हुआ, पर काम को समय सीमा में पूरा नहीं किया गया। स्थानीय लोग विधायक, पार्षद और महापौर के चक्कर काटते रहे, लेकिन उनकी गुहार अनसुनी रह गई। पार्षद के इन खुलासों से स्पष्ट है कि प्रशासन से लेकर सरकार तक की घोर लापरवाही की कीमत बेगुनाह लोगों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी है।
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