जिरीबाम राहत शिविर: छात्र का फंदे से लटका मिला शव, सनसनी

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जिरीबाम राहत शिविर: छात्र का फंदे से लटका मिला शव, सनसनी
मणिपुर के जिरीबाम में राहत शिविर में छात्र फंदे से लटका मिला

मणिपुर के राहत शिविर में एक छात्र का रहस्यमय निधन: क्या हिंसा की मार या कोई और वजह?

मणिपुर का जिरीबाम जिला, जो हिंसा की आग में झुलस रहा है, एक और दुखद घटना का गवाह बना है। रविवार को, एक राहत शिविर में रह रहा 13 वर्षीय छात्र युरेम्बम अंगम्बा सिंह, स्कूल के साइकिल पार्किंग शेड की छत से लटका हुआ पाया गया। यह घटना जहाँ एक तरफ मणिपुर में जारी जातीय संघर्ष के गहरे घावों को उजागर करती है, वहीं एक किशोर की मौत के पीछे के कारणों पर कई सवाल खड़े करती है।

क्या था घटना का मंजर?

जिरीबाम उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, जो फिलहाल हिंसा के कारण आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों के लिए एक राहत शिविर में तब्दील हो गया है, में युरेम्बम अंगम्बा सिंह का शव बरामद हुआ। पुलिस के अनुसार, प्रथम दृष्टया यह मामला आत्महत्या का प्रतीत होता है। बताया गया है कि लड़के ने रविवार दोपहर को यह खौफनाक कदम उठाया। उसे तत्काल जिरीबाम जिला अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। नाबालिग के पार्थिव शरीर को पोस्टमार्टम के लिए असम के सिलचर मेडिकल कॉलेज भेजा गया है, ताकि मौत के कारणों का सटीक पता लगाया जा सके।

जांच जारी, परिवार पर गहरा सदमा

जिरीबाम पुलिस थाने में इस घटना को लेकर मामला दर्ज कर लिया गया है और पुलिस अपनी जांच में जुटी हुई है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की पूरी तह तक जाने का प्रयास किया जा रहा है। यह घटना उस परिवार के लिए गहरे सदमे का कारण बनी है, जो पहले से ही मेइती और कुकी समुदायों के बीच चल रहे जातीय संघर्ष के कारण अपने घर-बार छोड़कर इस राहत शिविर में शरण लिए हुए थे। यह त्रासदी उस दर्दनाक हकीकत को और भी बढ़ा देती है कि कैसे हिंसा का साया बच्चों के जीवन पर भी पड़ रहा है।

क्या हिंसा ही है जिम्मेदार?

यह सवाल लाजिमी है कि क्या यह किशोर की मौत सिर्फ एक दुखद घटना है, या फिर यह उस जटिल और गंभीर स्थिति का परिणाम है जिसमें वह रह रहा था। मणिपुर में जारी जातीय संघर्ष ने न केवल लोगों की जान ली है, बल्कि अनगिनत लोगों को अपने घरों से विस्थापित किया है और उनके जीवन में एक असहनीय अनिश्चितता पैदा की है। ऐसे माहौल में, जहां लगातार भय और असुरक्षा का माहौल हो, एक किशोर के मानसिक स्वास्थ्य पर कितना गहरा असर पड़ा होगा, यह अंदाजा लगाना भी मुश्किल है। इस घटना की गहन जांच न केवल मौत के कारण का पता लगाने के लिए बल्कि हिंसा के ऐसे अनजाने परिणामों को समझने के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।


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