मुंबई
oi-Divyansh Rastogi
Updated: Friday, January 16, 2026, 21:30 [IST]
BMC Election Result 2026: महाराष्ट्र की सियासत में ‘सायरन’ का शोर अब भी गूंज रहा है। एशिया की सबसे अमीर नगर निकाय, ब्रिहनमुंबई महानगर पालिका (Brihanmumbai Municipal Corporation) के 2026 चुनाव ने एक नया इतिहास रच दिया है। 45 सालों के लंबे इंतजार के बाद, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और एकनाथ शिंदे वाली शिवसेना के महायुति गठबंधन ने बीएमसी पर प्रचंड बहुमत के साथ कब्जा जमा लिया है।
यह नतीजा सिर्फ एक चुनाव की जीत नहीं, बल्कि 1970-80 के दशक से चली आ रही ठाकरे परिवार की पकड़ का अंत भी है। बीजेपी ने 115+ सीटों पर कब्जा जमाकर साबित कर दिया कि विकास, हिंदुत्व और महिला-केंद्रित योजनाएं इस चुनाव की असली जीत बनीं। लेकिन सवाल यह है कि क्या राज्य सरकार की ‘लाड़की बहिन योजना’ के ₹1500 की किस्त ने महिला वोटर्स का मिजाज बदला? क्या यह चुनाव से ठीक पहले का ‘मास्टरस्ट्रोक’ था? और ठाकरे ब्रदर्स (उद्धव-राज) की जोड़ी क्लीन बोल्ड क्यों हो गई? आइए, इस रिपोर्ट में विस्तार से समझते हैं…
BMC Election 2026: कैसे चमका ‘बम-बम’ (BJP) का जलवा
बीएमसी चुनाव 15 जनवरी 2026 को हुआ, जहां 227 वार्डों के लिए 52.94% मतदान दर्ज किया गया। 16 जनवरी को जब नतीजे घोषित हुए, तो महायुति गठबंधन (बीजेपी + शिंदे शिवसेना + एनसीपी) ने 115+ सीटें जीतकर बहुमत (114 सीटें) का आंकड़ा पार कर लिया। बीजेपी अकेले 92+ वार्ड्स पर विजयी रही, जबकि शिंदे शिवसेना ने 26+ सीटें जीतीं।
यह 1977 के बाद पहली बार है जब बीजेपी-केंद्रित गठबंधन ने बीएमसी पर कब्जा किया है। 45 साल पहले बाल ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने यहां प्रभुत्व जमाया था, जो 2026 तक उद्धव ठाकरे गुट (यूबीटी) तक चला, लेकिन इस बार बाजी पलट गई।
- कुंजी फैक्टर्स: बीजेपी की जीत में विकास प्रोजेक्ट्स (कोस्टल रोड, मेट्रो), हिंदुत्व और महिला-केंद्रित योजनाएं अहम रहीं। मुंबई में महिला वोटर्स करीब 47% हैं, और महायुति ने उन्हें टारगेट करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। बीएमसी का बजट करीब 74,400 करोड़ रुपये का है, जो अब महायुति के हाथों में आएगा।
- ट्रेंड्स: एग्जिट पोल्स (एक्सिस माई इंडिया ने महायुति को 131-151 सीटें दी थीं) सही साबित हुए। ठाकरे गुट (यूबीटी + एमएनएस) 58-68 सीटों पर सिमट गया, जबकि कांग्रेस 10-12 सीटों पर खिसक गई। यह जीत महाराष्ट्र की 29 नगर महापालिकाओं में महायुति की स्वीप का हिस्सा है।
Ladki Bahin Yojana का ‘कमाल’: ₹1500 की किस्त ने किया कमाल?
चुनाव नतीजों के बाद सबसे ज्यादा चर्चा महाराष्ट्र सरकार की ‘मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिण योजना’ की हो रही है। इस योजना ने चुनावी समर में बड़ा रोल निभाया। यह योजना गरीब महिलाओं को हर महीने ₹1500 की आर्थिक मदद देती है, जिससे करीब 1 करोड़ महिलाएं लाभान्वित हुईं।
चुनाव से ठीक एक दिन पहले (14 जनवरी 2026) दिसंबर 2025 की ₹1500 की किस्त लाभार्थियों के खातों में डाली गई, जिसे मकर संक्रांति के मौके पर ‘सौगात’ बताया गया। हालांकि, जनवरी 2026 की किस्त को चुनाव आयोग ने रोक दिया, क्योंकि यह आचार संहिता का उल्लंघन था।
- विवाद की जड़: यूबीटी नेता संजय राउत ने इसे ‘चुनावी रिश्वत’ करार दिया, जबकि कांग्रेस ने भी इसे लेकर राज्य चुनाव आयोग से शिकायत की। सरकार ने दिसंबर और जनवरी की ₹3000 की दो किस्तें देने की घोषणा की थी, लेकिन आयोग ने जनवरी की एडवांस किस्त पर रोक लगा दी।
- आयोग का फैसला: मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल की रिपोर्ट के बाद आयोग ने स्पष्ट किया कि ‘सतत योजना’ (जैसे संजय गांधी निराधार योजना) जारी रह सकती है, लेकिन नए लाभार्थी या एडवांस पेमेंट नहीं दिए जा सकते। इसलिए दिसंबर की ₹1500 दी गई, लेकिन जनवरी की रोकी गई।
- प्रभाव: सर्वे बताते हैं कि इस योजना ने महिला वोटर्स (जिनमें से 69% अनडिसाइडेड थे) को महायुति की तरफ झुकाया। मुंबई में महिलाओं का टर्नआउट ऊंचा रहा और महायुति को 44% महिला सपोर्ट मिला। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह ‘कमाल’ बीजेपी की 45 साल पुरानी जीत का एक बड़ा कारण है।
ठाकरे ब्रदर्स की हार: क्लीन बोल्ड क्यों हुए उद्धव और राज?
उद्धव और राज ठाकरे ने चुनाव से पहले गठबंधन किया था, लेकिन ‘मराठी मानुष’ का नारा इस बार कमाल नहीं दिखा सका। यूबीटी + एमएनएस 58-68 सीटों पर सिमट गए, जो 2017 के 84+ सीटों से काफी कम है। ठाकरे ब्रदर्स की जोड़ी को ‘क्लीन बोल्ड’ इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि:
- विभाजन का नुकसान: शिवसेना के स्प्लिट (शिंदे vs उद्धव) ने वोट बांटे। शिंदे गुट ने मराठी वोटर्स (37%) को विकास के मुद्दे पर जोड़ा, जबकि ठाकरे अस्मिता पर अटके रह गए।
- महिला वोट: लाड़की बहिन योजना ने महिलाओं को महायुति की तरफ खींचा, जहां ठाकरे गुट पूरी तरह कमजोर पड़ गया।
- युवा और लोकल इश्यूज: युवा वोटर्स (18-29 साल) ने अस्मिता से ज्यादा सड़क, पानी और भ्रष्टाचार जैसे लोकल मुद्दों पर फोकस किया।
- रिजल्ट: ठाकरे परिवार की 30+ साल की सत्ता का परचम इस बार बीएमसी में नहीं लहरा सका, और पहली बार बीजेपी से मेयर बनने की उम्मीद है।
डीप एनालिसिस: क्या ₹1500 ने वाकई कमाल किया?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि लाड़की बहिन योजना ने महिला वोटर्स को प्रभावित किया, लेकिन जीत के अन्य फैक्टर भी उतने ही अहम थे, जैसे मोदी-फडणवीस की इमेज, शिंदे की मराठी अपील और ठाकरे की फूट। विवाद के बावजूद, आयोग ने योजना को ‘सतत’ माना, जो नियमों के हिसाब से सही भी था। लेकिन चुनाव से पहले ट्रांसफर को ‘टाइमिंग का कमाल’ कहा जा रहा है।
कुल मिलाकर, 45 साल बाद बीजेपी का ‘बम-बम’ विकास और महिला सशक्तिकरण का जादुई नतीजा है। यह जीत महायुति के लिए एक बड़ा कॉन्फिडेंस बूस्टर है, जबकि ठाकरे ब्रदर्स और विपक्ष के लिए यह सवालों के घेरे में आने वाला समय है।
महाराष्ट्र सियासत का भविष्य
बीएमसी 2026 ने साबित किया कि महाराष्ट्र में महायुति का दौर है, जहां लाड़की बहिन योजना जैसी स्कीम्स ने महिला वोटर्स को अपनी तरफ मोड़ा। ठाकरे ब्रदर्स की हार से एमवीए (महा विकास आघाडी) कमजोर हुआ है, लेकिन कांग्रेस की कुछ जीतें (जैसे लातूर) दिखाती हैं कि विपक्ष अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। आने वाले समय में मुंबई के विकास पर महायुति का फोकस महत्वपूर्ण होगा, लेकिन विवादित योजनाओं पर नजर रखनी होगी।
English summary
BMC Election Result 2026: Ladki Bahin Yojana 1500 Kist Role In BJP Shinde Sena Victory 45 Years Fueled News Hindi
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