पहाड़ों की रानी पर कुदरत का कहर: बारिश ने मचाई तबाही, 23 जिंदगियां काल के गाल में समाईं
दार्जिलिंग, पश्चिम बंगाल: प्रकृति का रौद्र रूप एक बार फिर ‘पहाड़ों की रानी’ दार्जिलिंग पर टूट पड़ा है। अनवरत हो रही मूसलाधार बारिश ने समूचे क्षेत्र को तहस-नहस कर दिया है, जिसमें कम से कम 23 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है और कई अन्य घायल बताए जा रहे हैं। रविवार को मिरिक और दार्जिलिंग की पहाड़ियों में हुए भयावह भूस्खलनों ने सब कुछ तबाह कर दिया, घरों को निगल लिया, सड़कों को चीर दिया और सैकड़ों पर्यटकों को बेबस फंसा दिया।
12 घंटे पहले मिली चेतावनी, फिर भी विनाश: भारतीय मौसम विभाग ने 3 अक्टूबर की रात से शुरू हुई इस प्रलयंकारी बारिश की चेतावनी मात्र 12 घंटे पहले जारी की थी। लेकिन छह घंटे की मूसलाधार बारिश ने बालासन नदी पर बने दुधिया पुल को लील लिया, जो सिलीगुड़ी को मनोरम पर्यटन नगरी मिरिक से जोड़ता था। इतना ही नहीं, सभी राष्ट्रीय और राज्य राजमार्ग भी इस प्रलयंकारी वर्षा की भेंट चढ़ गए, जिससे आवागमन पूरी तरह ठप्प हो गया।
इतिहास गवाह, दार्जिलिंग पर आपदाओं का साया: अपनी मनमोहक सुंदरता और स्वास्थ्यवर्धक जलवायु के लिए विश्वविख्यात दार्जिलिंग, प्राकृतिक आपदाओं से अछूता नहीं रहा है। उपलब्ध रिकॉर्ड बताते हैं कि 1899, 1934, 1950, 1968, 1975, 1980, 1991 और हाल ही में 2011 व 2015 में भी यहाँ बड़े पैमाने पर भूस्खलन हुए हैं। विशेष रूप से, वर्ष 1968 में इसी अक्टूबर माह में आई विनाशकारी बाढ़ ने एक हज़ार से अधिक जानें लील ली थीं।
भूस्खलन की भयावहता और बचाव अभियान: एनडीआरएफ और पश्चिम बंगाल सरकार के दार्जिलिंग व जलपाईगुड़ी जिला प्रशासन की संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार, सरसली, जसबीरगांव, मिरिक बस्ती, धार गांव (मेची), नागराकाटा और मिरिक झील क्षेत्र से हताहतों की खबर सामने आई है। निकटवर्ती जलपाईगुड़ी जिले के नागराकाटा में भी भूस्खलन के मलबे से पांच शव बरामद किए गए हैं। एनडीआरएफ के एक अधिकारी ने पुष्टि करते हुए कहा, “अब तक मिरिक, दार्जिलिंग और जलपाईगुड़ी में कुल 23 लोगों की मौत हो चुकी है।”
उत्तर बंगाल विकास मंत्री उदयन गुहा ने इस विनाश को “चिंताजनक” बताते हुए कहा, “स्थिति चिंताजनक है।” दार्जिलिंग क्षेत्र को नियंत्रित करने वाले गोरखालैंड प्रादेशिक प्रशासन (जीटीए) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अनित थापा ने बताया कि ‘पहाड़ों की रानी’ के रूप में प्रसिद्ध इस सुरम्य क्षेत्र में 35 स्थानों पर भूस्खलन की सूचना मिली है।
एनडीआरएफ के बयान के अनुसार, भूस्खलन से सबसे अधिक प्रभावित मिरिक में कम से कम 11 लोगों की जान गई है और सात घायलों को बचा लिया गया है। दार्जिलिंग में सात लोगों की मौत हुई है और बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी है। दार्जिलिंग उप-मंडल अधिकारी (एसडीओ) रिचर्ड लेप्चा ने बताया, “कल रात से हो रही भारी बारिश के कारण दार्जिलिंग उपखंड में हुए भीषण भूस्खलन में सात लोगों की मौत हो गई है। बचाव और राहत कार्य जारी है।”
फंसे पर्यटक और मुख्यमंत्री का आश्वासन: दुर्गा पूजा और उसके बाद के उत्सवों का आनंद लेने आए सैकड़ों पर्यटक भारी बारिश के कारण हुए भूस्खलन के चलते फंस गए हैं। इनमें कोलकाता और बंगाल के अन्य हिस्सों से आए परिवार और समूह शामिल थे। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पीड़ितों के लिए मुआवजे की घोषणा की है और कहा है कि वह 6 अक्टूबर को उत्तर बंगाल का दौरा करेंगी। उन्होंने पर्यटकों को आश्वासन दिया कि राज्य सरकार उन्हें सुरक्षित वापस लाने की व्यवस्था करेगी और घबराने की अपील की है।
प्रधानमंत्री और मौसम विभाग की चेतावनी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस त्रासदी पर गहरा दुख व्यक्त किया है और कहा है कि सरकार प्रभावित लोगों को हरसंभव सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने दार्जिलिंग और कलिम्पोंग सहित उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल में 6 अक्टूबर तक अत्यधिक भारी वर्षा का रेड अलर्ट जारी किया है, साथ ही मिट्टी की नाजुक स्थिति के कारण और अधिक भूस्खलन की चेतावनी दी है।
एनडीआरएफ के अनुसार, दार्जिलिंग जिले और उत्तरी सिक्किम में सड़क संपर्क गंभीर रूप से बाधित है और सिलीगुड़ी को मिरिक-दार्जिलिंग मार्ग से जोड़ने वाला एक लोहे का पुल क्षतिग्रस्त हो गया है, जिससे इस क्षेत्र तक पहुंच लगभग असंभव हो गई है।
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