सोनम वांगचुक के NGO पर सरकार का शिकंजा: एफसीआरए लाइसेंस रद्द, विदेशी चंदे पर सवाल
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने गुरुवार को लद्दाख के मशहूर शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) ‘स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख’ (SECMOL) का विदेशी चंदा प्राप्त करने का लाइसेंस, यानी एफसीआरए लाइसेंस, तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है। यह कड़ा कदम लद्दाख में हाल ही में भड़की हिंसा के बाद उठाया गया है, जिसमें चार लोगों की दुखद मृत्यु हो गई थी और कई अन्य घायल हो गए थे।
गृह मंत्रालय (एमएचए) ने अपने एक सख्त आदेश में कहा है कि वांगचुक के एनजीओ ने विदेशी चंदा नियमों का ‘बार-बार’ उल्लंघन किया है। मंत्रालय के अनुसार, वांगचुक के व्यक्तिगत और संयुक्त खातों में विदेशी धन प्राप्त हुआ, जो एफसीआरए 2010 के प्रावधानों का सीधा उल्लंघन है। चिंताजनक बात यह है कि 2021 से 2024 के बीच एनजीओ को विदेशों से करोड़ों रुपये प्राप्त हुए, और इस पैसे का अज्ञात संस्थाओं को भेजा जाना मनी लॉन्ड्रिंग की आशंकाओं को भी बढ़ाता है।
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गृह मंत्रालय ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि सोनम वांगचुक स्वयं को जनता के प्रतिनिधि के रूप में प्रस्तुत करते हैं, लेकिन उनके वित्तीय रिकॉर्ड कुछ और ही कहानी बयां करते हैं। मंत्रालय का मानना है कि उनके कार्यों से रचनात्मक संवाद बाधित हो रहा है और वास्तविक मुद्दों को निजी और राजनीतिक लाभ के औजार में बदला जा रहा है।
59 वर्षीय वांगचुक के नौ निजी बैंक खाते हैं, जिनमें से आठ की उन्होंने कभी घोषणा नहीं की। इन गुप्त खातों में भारी मात्रा में विदेशी धन जमा पाया गया है। इसके अलावा, वांगचुक ने 2021 से 2024 के बीच अपने निजी खातों से लगभग 2.3 करोड़ रुपये विदेश भेजे हैं।
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मंत्रालय ने यह भी उजागर किया कि वांगचुक को 2018 से 2024 के बीच विभिन्न खातों में 1.68 करोड़ रुपये का विदेशी धन मिला। यह विरोधाभासी है कि वे कॉर्पोरेट जगत की आलोचना करते हैं, लेकिन केंद्र सरकार के सार्वजनिक उपक्रमों सहित विभिन्न कॉर्पोरेट संस्थाओं से कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के तहत भारी धनराशि स्वीकार करते रहे हैं।
गौरतलब है कि लद्दाख में हालिया हिंसा में चार लोगों की जान चली गई थी और 40 पुलिसकर्मियों सहित 80 से अधिक लोग घायल हुए थे। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें लद्दाख को राज्य का दर्जा देना और छठी अनुसूची का विस्तार करना था। यह अनुसूची आदिवासी आबादी के लिए शासन, राष्ट्रपति और राज्यपाल की शक्तियों, स्थानीय निकायों, वैकल्पिक न्यायिक तंत्र और स्वायत्त परिषदों के माध्यम से वित्तीय शक्तियों जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में विशेष प्रावधान करती है।
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