महाराष्ट्र निकाय चुनाव: क्या एक बार फिर महायुति बिठाएगी सत्ता की हैट्रिक?

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Maharashtra Municipal Corporation Election Results: क्या बीजेपी के नेतृत्व वाला गठबंधन राज्य में जीत हासिल करेगा?

महाराष्ट्र राजनीति का ‘महा-फैसला’: 29 नगर निगमों के नतीजे आज, सत्ता के समीकरण पर नज़र

16 जनवरी, 2026 का दिन महाराष्ट्र की राजनीति के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज होने जा रहा है। आज ‘महा-फैसले’ का दिन है, जहाँ राज्य के 29 नगर निगमों के चुनाव परिणाम घोषित हो रहे हैं। इनमें देश का सबसे अमीर नगर निकाय बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) का फैसला भी शामिल है। सुबह 10 बजे से शुरू हुई मतगणना के रुझान राज्य की सत्ता के गणित को एक नई दिशा देते नजर आ रहे हैं।

बीते गुरुवार को मुंबई और महाराष्ट्र के 28 अन्य नगर निगमों में लगभग 50 प्रतिशत वोटिंग दर्ज की गई। हालांकि, मतदान के दौरान एक बड़ा विवाद भी खड़ा हुआ जब वोटरों की उंगलियों पर लगाई गई स्याही आसानी से साफ होने का मामला सामने आया।

राज्य चुनाव आयुक्त दिनेश वाघमारे ने बताया कि 29 नगर निकायों में वोटिंग 46-50 प्रतिशत के बीच रही। यदि 2017 के आंकड़ों पर नजर डालें, तो मुंबई में वोटिंग प्रतिशत 55.53 था, जबकि उस समय 26 निगमों में औसत वोटिंग 56.35 प्रतिशत थी (जालना और इचलकरंजी नगर निगमों में पहली बार चुनाव हुए थे)।

किन शहरों में हुए चुनाव?

15 जनवरी को जिन नगर निगमों में मतदान हुआ, उनमें मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई, उल्हासनगर, कल्याण-डोंबिवली, भिवंडी-निजामपुर, मीरा-भयंदर, वसई-विरार, पनवेल, नासिक, मालेगांव, अहिल्यानगर, जलगांव, धुले, पुणे, पिंपरी-चिंचवड़, सोलापुर, कोल्हापुर, इचलकरंजी, सांगली-मिराज-कुपवाड़, छत्रपति संभाजीनगर, नांदेड़-वाघला, परभणी, जालना, लातूर, अमरावती, अकोला, नागपुर और चंद्रपुर शामिल हैं।

राजनीतिक मायने और गठबंधन के समीकरण

यह चुनाव केवल नगर निकायों का नहीं, बल्कि आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की सत्ता की दिशा तय करने वाला लिटमस टेस्ट है। इस बार ठाकरे बंधुओं (उद्धव और राज) का एक साथ आना और अजित पवार बनाम शरद पवार की सीधी भिड़ंत ने इन चुनावों को ऐतिहासिक बना दिया है।

  • महायुति: विकास और केंद्र-राज्य के ‘डबल इंजन’ के मुद्दे पर चुनाव लड़ी।
  • MVA: स्थानीय अस्मिता और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर मैदान में उतरी।

विवाद: स्याही और वोटर लिस्ट

मतदान के दिन मुंबई सहित कई शहरों में मिटने वाली स्याही (Erasable Ink) को लेकर विवाद खड़ा हुआ। इस मुद्दे पर उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने गंभीर सवाल उठाए और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर निशाना साधा। हालांकि, चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए जांच के आदेश दिए हैं।


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