राष्ट्रीय सुरक्षा: समन्वय और नागरिक भागीदारी ही हैं सफलता की कुंजी
नई दिल्ली: पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राष्ट्रीय संसाधनों के प्रभावी उपयोग और सुरक्षा एजेंसियों के बीच सुदृढ़ समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने राष्ट्रीय पुलिस स्मारक, नई दिल्ली में आयोजित एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि एक मजबूत सुरक्षा तंत्र के निर्माण में समाज और पुलिस की सहभागिता अत्यंत महत्वपूर्ण है।
समाज और पुलिस का अटूट रिश्ता
रक्षा मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि समाज और पुलिस एक-दूसरे के पूरक हैं। जब नागरिक कानून का सम्मान करते हुए भागीदार बनते हैं, तभी पुलिस व्यवस्था अपनी पूर्ण क्षमता से कार्य कर पाती है। आपसी समझ और साझा जिम्मेदारी पर आधारित यह संबंध न केवल समाज को समृद्ध करता है, बल्कि सुरक्षा को भी मजबूत करता है। उन्होंने नागरिकों से आह्वान किया कि वे आंतरिक सुरक्षा को बढ़ाने और एक सामंजस्यपूर्ण समाज के निर्माण हेतु कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ सक्रिय रूप से सहयोग करें।
शहीदों को नमन, राष्ट्र की सुरक्षा का संकल्प
इस महत्वपूर्ण अवसर पर, रक्षा मंत्री ने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर पुलिसकर्मियों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने 1959 में लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स में चीनी सैनिकों के दुस्साहसिक हमले में शहीद हुए 10 बहादुर पुलिसकर्मियों के असाधारण साहस और सेवा को याद किया। उन्होंने सशस्त्र बलों और पुलिस बलों को राष्ट्र की सुरक्षा के दो मजबूत स्तंभ बताया, जो क्रमशः देश की भौगोलिक और सामाजिक अखंडता की रक्षा करते हैं।
2047 तक विकसित भारत: बाहरी और आंतरिक सुरक्षा का संतुलन
रक्षा मंत्री ने कहा, “सेना और पुलिस भले ही अलग-अलग मंचों पर काम करते हों, लेकिन उनका मिशन एक ही है – राष्ट्र की रक्षा करना। 2047 तक विकसित भारत की ओर बढ़ते हुए, राष्ट्र की बाहरी और आंतरिक सुरक्षा में संतुलन बनाना पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।” उन्होंने वर्तमान चुनौतियों को रेखांकित किया, जिसमें सीमाओं पर अस्थिरता के साथ-साथ समाज के भीतर उभरते नए प्रकार के अपराध, आतंकवाद और वैचारिक युद्ध शामिल हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि अपराध अब अधिक संगठित, अदृश्य और जटिल हो गया है, जिसका उद्देश्य समाज में अराजकता फैलाना, विश्वास को तोड़ना और राष्ट्र की स्थिरता को चुनौती देना है।
विश्वास की नींव: पुलिस की भूमिका
राजनाथ सिंह ने अपराधों को रोकने की अपनी आधिकारिक जिम्मेदारी के साथ-साथ समाज में विश्वास बनाए रखने के नैतिक कर्तव्य को निभाने के लिए पुलिस की सराहना की। उन्होंने कहा, “अगर आज लोग चैन की नींद सो रहे हैं, तो इसका कारण हमारे सतर्क सशस्त्र बलों और सतर्क पुलिस पर उनका भरोसा है। यही भरोसा हमारे देश की स्थिरता की नींव है।”
नक्सलवाद पर काबू: समन्वय की सफलता
नक्सलवाद जैसी गंभीर आंतरिक सुरक्षा चुनौती का उल्लेख करते हुए, रक्षा मंत्री ने पुलिस, सीआरपीएफ, बीएसएफ और स्थानीय प्रशासन के संगठित और समन्वित प्रयासों की प्रशंसा की। इन संयुक्त प्रयासों के परिणामस्वरूप, वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों के लोगों ने राहत की सांस ली है और समस्या को बढ़ने से रोका गया है।
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