नेपाल की जेलों से 540 भारतीय कैदियों का रहस्यमयी पलायन, सरकार की नींद उड़ी
काठमांडू: नेपाल की विभिन्न जेलों में सजा काट रहे लगभग 540 भारतीय कैदियों के अचानक गायब हो जाने से पूरे देश में हड़कंप मच गया है। जेल प्रबंधन विभाग द्वारा रविवार को दी गई जानकारी के अनुसार, नौ सितंबर को सरकार विरोधी ‘जेन जी’ प्रदर्शनों के उग्र होने के दूसरे दिन नेपाल की जेलों में भारी अशांति फैल गई थी, इसी अराजकता का फायदा उठाकर 13,000 से अधिक कैदियों ने जेल की सलाखों को तोड़कर फरार होने में सफलता हासिल की। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम के मद्देनज़र नेपाल सरकार ने मामले की तह तक जाने के लिए एक उच्च-स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।
अंतर्राष्ट्रीय कैदियों का भी पलायन, हाई अलर्ट जारी
जेल प्रशासन द्वारा जारी किए गए नवीनतम आंकड़ों से इस गंभीर स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। कुल भागे हुए कैदियों में से लगभग 5,000 नेपाली नागरिक हैं, जबकि 540 भारतीय नागरिक और अन्य देशों के 108 कैदी भी इस सामूहिक पलायन का हिस्सा रहे और फिलहाल उनका कोई सुराग नहीं मिला है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, नेपाल सरकार ने इन फरार कैदियों की धरपकड़ के लिए पूरे देश में हाई अलर्ट घोषित कर दिया है। गृह मंत्रालय ने सभी फरार कैदियों को तत्काल आत्मसमर्पण करने या अपनी जेलों में रिपोर्ट करने का अल्टीमेटम जारी किया है, अन्यथा उन पर कठोर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
सुरक्षा एजेंसियों का सघन अभियान, सीमा पर कड़ी चौकसी
जेल प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा एजेंसियां लगातार फरार कैदियों की तलाश में छापेमारी कर रही हैं। इसके साथ ही, नेपाल की सीमावर्ती इलाकों में निगरानी को बेहद कड़ा कर दिया गया है, ताकि कोई भी फरार कैदी देश से बाहर न निकल सके। भारत-नेपाल सीमा पर भी सुरक्षा बलों की चौकसी बढ़ा दी गई है, ताकि किसी भी तरह की अनहोनी को रोका जा सके। अधिकारियों के अनुसार, अब तक 7,735 कैदी या तो खुद लौट आए हैं या फिर उन्हें हिरासत में लेकर जेलों में वापस भेजा जा चुका है। हालांकि, इस दौरान हुई मुठभेड़ों में कम से कम दस कैदियों की दुखद मौत भी हो गई है।
‘जेन जी’ प्रदर्शनों की चिंगारी जिसने बदल दी सरकार
यह बताया जा रहा है कि आठ और नौ सितंबर को ‘जेन जी’ समूह के नेतृत्व में हजारों युवाओं ने काठमांडू सहित देश के अन्य शहरों में सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किए थे। इन प्रदर्शनों में कम से कम 76 लोगों की जान चली गई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे। प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर भ्रष्टाचार, बढ़ती बेरोजगारी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। इन्हीं प्रदर्शनों की आड़ में जेलों में अराजकता फैल गई और कैदियों ने इस मौके को भुनाते हुए जेल से भागने का ताना-बाना बुना।
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