बच्चों की जान का दुश्मन: ‘कोल्ड्रिफ कफ सिरप’ पर देशभर में रोक, खतरनाक केमिकल का खुलासा!
पूरे देश में मिलावटी और नकली दवाओं का जाल फैलता जा रहा है, जिसने अब मासूम बच्चों की जान खतरे में डाल दी है। इस गंभीर चिंता को देखते हुए, दिल्ली सरकार ने बच्चों के लिए इस्तेमाल होने वाले ‘कोल्ड्रिफ कफ सिरप’ की बिक्री, वितरण और उपयोग पर तत्काल प्रभाव से पूरी तरह रोक लगा दी है। यह कड़ा फैसला सिरप में पाए गए अत्यंत खतरनाक केमिकल, डायएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) की भारी मात्रा के खुलासे के बाद लिया गया है। यह केमिकल न सिर्फ गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकता है, बल्कि दुर्भाग्यवश, अब तक कई बच्चों की मौत का कारण भी बन चुका है।
क्या है पूरा मामला?
दिल्ली सरकार के औषधि नियंत्रण विभाग द्वारा 10 अक्टूबर को जारी एक सार्वजनिक सूचना में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि कोल्ड्रिफ सिरप के एक सैंपल में 42.28% डायएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) मिला है, जो स्वीकार्य सामान्य मात्रा से कहीं अधिक है। यह केमिकल आमतौर पर औद्योगिक कामों में उपयोग होता है, लेकिन जब यह दवाओं में मिल जाता है, तो यह किडनी फेलियर, लिवर को गंभीर नुकसान, अंधापन और यहां तक कि मृत्यु का कारण बन सकता है।
20 बच्चों की जा चुकी है जान!
बच्चों में खांसी और बुखार के आम इलाज के तौर पर इस्तेमाल होने वाला कोल्ड्रिफ कफ सिरप अब एक जानलेवा साबित हुआ है। इस सिरप के सेवन से अब तक कम से कम 20 बच्चों की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जिसने पूरे देश में हड़कंप मचा दिया है।
अवेयर मीडिया नेटवर्क
दिल्ली ही नहीं, इन राज्यों में भी लगा बैन!
दिल्ली सरकार के इस कड़े कदम के बाद, कई अन्य राज्यों ने भी इस खतरनाक सिरप के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है:
- केरल
- तमिलनाडु
- मध्य प्रदेश
- पंजाब
दिल्ली सरकार की नागरिकों से अपील
सरकार ने एक सार्वजनिक चेतावनी जारी करते हुए सभी नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी सूरत में कोल्ड्रिफ कफ सिरप का इस्तेमाल न करें। यदि किसी के पास यह सिरप मौजूद है, तो उसे तुरंत सुरक्षित तरीके से नष्ट कर दें या अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जमा करा दें।
सिरप में छिपा था जानलेवा केमिकल!
सरकारी जांच रिपोर्टों ने इस मामले की तह तक जाकर खुलासा किया है कि प्रतिबंधित Coldrif कफ सिरप का निर्माण ‘सीसन फार्मास्युटिकल्स’ नामक कंपनी द्वारा किया गया है। कंपनी का उत्पादन संयंत्र तमिलनाडु के कांचीपुरम जिले में स्थित है। चौंकाने वाली बात यह है कि जांच में बैच नंबर SR-13 (निर्माण: मई 2025, समाप्ति: अप्रैल 2027) में डायएथिलीन ग्लाइकॉल (Diethylene Glycol) की 42.28% w/v मात्रा पाई गई, जो न केवल अत्यधिक खतरनाक है, बल्कि सामान्य स्वीकृत सीमा से भी कहीं ज्यादा है।
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