भारत में सांस्कृतिक पुनर्जागरण की लहर, मोदी ने लिया नौ संकल्पों का आह्वान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को भारत में एक अभूतपूर्व सांस्कृतिक पुनर्जागरण का उद्घोष किया। उन्होंने कहा कि आज का भारत नए संकल्पों और असीम आत्मविश्वास के साथ अपनी समृद्ध सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है। दक्षिण गोवा के परतगली स्थित श्री संस्थान गोकर्ण परतगली जीवोत्तम मठ में 77 फीट ऊंची भगवान राम की कांस्य प्रतिमा का अनावरण करते हुए, प्रधानमंत्री ने जनमानस से जल संरक्षण और स्वदेशी अपनाने जैसे नौ महत्वपूर्ण संकल्प लेने का आग्रह किया।
आस्था का संगम, सेवा का संगम: मठ का गौरवशाली इतिहास
प्रधानमंत्री मोदी ने मठ को मूल्यों को अक्षुण्ण रखने वाले एक आधारशिला के रूप में सराहा, जो आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरणा देता रहेगा। उन्होंने सेवा की भावना को मठ की एक विशिष्टता बताया, जिसने सदियों से समाज के हर वर्ग को सहारा दिया है। प्रधानमंत्री ने अतीत की एक मार्मिक घटना का उल्लेख किया, जब इस क्षेत्र ने विपत्ति का सामना किया था और लोगों को अपने घर-परिवार छोड़कर नई भूमि पर शरण लेनी पड़ी थी। ऐसे कठिन समय में, इस मठ ने न केवल समुदाय को संभाला, बल्कि नए स्थानों पर मंदिर और आश्रय भी स्थापित किए। यह पहल धर्म, मानवता और संस्कृति के संरक्षण का एक अनुपम उदाहरण बनी।
समर्पण और सेवा का विस्तार: जन कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता
समय के साथ, मठ की सेवाओं का दायरा बढ़ता गया। आज, यह मठ शिक्षा, छात्रावासों, वृद्धों की देखभाल और जरूरतमंद परिवारों की सहायता जैसे क्षेत्रों में अथक सेवा दे रहा है। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि मठ ने हमेशा अपने संसाधनों को जन कल्याण के लिए समर्पित किया है।
युवा शक्ति और सांस्कृतिक जड़ें: नए भारत का निर्माण
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत वर्तमान में अपने इतिहास के एक महत्वपूर्ण मोड़ से गुजर रहा है। युवाओं की ऊर्जा और उनकी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से गहरा जुड़ाव, एक नए भारत को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि युवाओं की यह ऊर्जा, बढ़ता आत्मविश्वास और सांस्कृतिक जड़ों से यह नया जुड़ाव, एक ‘नए भारत’ के निर्माण का मार्ग प्रशस्त कर रहा है।
आत्मनिर्भरता और आध्यात्मिकता का समन्वय: विकसित भारत का स्वप्न
प्रधानमंत्री ने कहा कि एक विकसित, आत्मनिर्भर भारत का सपना तभी साकार हो सकता है, जब आध्यात्मिकता, राष्ट्र सेवा और विकास, एक ही उद्देश्य के साथ, सामंजस्यपूर्ण ढंग से आगे बढ़ें। गोवा और यह मठ, इस साझा लक्ष्य की दिशा में अमूल्य योगदान दे रहे हैं।
सांस्कृतिक पुनर्जागरण के प्रतीक
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भारत जिस सांस्कृतिक पुनर्जागरण का साक्षी बन रहा है, उसके प्रमाण अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण, काशी विश्वनाथ धाम का अभूतपूर्व पुनरुद्धार और उज्जैन में महाकाल महलोक का विस्तार हैं। ये सभी घटनाएं, देश की नई चेतना और उसकी आध्यात्मिक विरासत के सशक्त पुनरुत्थान को दर्शाती हैं।
‘रामायण थीम पार्क गार्डन’ का उद्घाटन और विशिष्ट प्रकाशन
प्रधानमंत्री मोदी ने मठ द्वारा विकसित ‘रामायण थीम पार्क गार्डन’ का भी उद्घाटन किया। उन्होंने एक विशेष डाक टिकट और एक स्मारक सिक्का भी जारी किया।
मठ का परिचय: द्वैत संप्रदाय का प्रकाश
श्री संस्थान गोकर्ण परतगली जीवोत्तम मठ, पहला गौड़ सारस्वत ब्राह्मण वैष्णव मठ है, जो 13वीं शताब्दी में जगद्गुरु माधवाचार्य द्वारा स्थापित द्वैत संप्रदाय का अनुसरण करता है। यह मठ दक्षिण गोवा के परतगली नामक एक सुरम्य शहर में, कुशावती नदी के तट पर स्थित है।
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