धर्मज: भारत का वो अनोखा गांव जहां मर्सिडीज हैं आम और बैंक खातों में हैं करोड़ों!
भारत की भूमि पर ऐसे कई गांव बसे हैं जो अपनी समृद्धि और जीवनशैली के लिए जाने जाते हैं। लेकिन गुजरात के आणंद जिले में स्थित एक ऐसा गांव है जो अपनी विशिष्ट पहचान के कारण चर्चा में है – ‘एनआरआई का गांव’ धर्मज। यहां की विलासिता का आलम यह है कि मर्सिडीज और बीएमडब्ल्यू जैसी लग्जरी कारें यहां खिलौनों सी लगती हैं, और बैंकों में जमा रकम 1000 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर चुकी है।
130 साल पुरानी विदेश यात्रा की अनूठी गाथा
धर्मज की यह अद्भुत समृद्धि कोई आज की बात नहीं, बल्कि इसकी जड़ें 1895 में रोपी गई थीं। उस दौर में, गांव के दो साहसी युवाओं, जोताराम काशीराम पटेल और चतुरभाई पटेल, ने युगांडा की ओर रुख किया। यह पहला कदम था जिसने कई और लोगों को विदेश जाने की प्रेरणा दी। प्रभुदास पटेल मैनचेस्टर में बस गए और “मैनचेस्टरवाला” के नाम से प्रसिद्ध हुए, जबकि गोविंदभाई पटेल ने अदन में तंबाकू का कारोबार जमाया। यहीं से धर्मज की वह यात्रा शुरू हुई जिसने इस छोटे से गांव को वैश्विक पटल पर एक खास पहचान दिलाई।
दुनिया भर में फैली हैं धर्मज के प्रवासी परिवारों की जड़ें
आज धर्मज के प्रवासी परिवार दुनिया के हर कोने में फैले हुए हैं। मनी कंट्रोल की एक रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिटेन में लगभग 1,700, अमेरिका में 800, कनाडा में 300 और ऑस्ट्रेलिया व न्यूजीलैंड में 150 परिवार यहां से जुड़े हैं। अफ्रीका, दुबई और अन्य देशों में भी सैकड़ों परिवार बसते हैं। लेकिन इन सबके बीच, इन लोगों ने अपनी जड़ों को कभी नहीं छोड़ा। वे न केवल अपने गांव लौटते हैं, बल्कि इसके विकास में धन और समय दोनों का अमूल्य योगदान भी देते हैं।
2007 से शुरू हुआ विकास का एक संगठित सफर
गांव के विकास को एक नई दिशा और गति 2007 में मिली, जब एनआरआई समुदाय और स्थानीय पंचायत ने मिलकर “धर्मज विकास मॉडल” को अपनाया। इस पहल ने भारत के ग्रामीण जीवन की तस्वीर ही बदल दी। आज गांव की हर सड़क आरसीसी ब्लॉक से पक्की है, और स्वच्छता की व्यवस्था शहरों को भी मात देती है। पंचायत और ग्रामीण मिलकर रोजमर्रा की स्वच्छता सुनिश्चित करते हैं, जिससे कूड़े के ढेर या बदबूदार पानी के गड्ढे यहां देखने को नहीं मिलते – एक ऐसा नज़ारा जो भारत के अधिकांश गांवों के लिए आज भी एक सपना है।
हरा-भरा और आनंदमय जीवन: धर्मज की एक और पहचान
धर्मज में जीवन सिर्फ समृद्ध ही नहीं, बल्कि संतुलित और खुशहाल भी है। गांव के गौचर (चरागाह) में स्थित सूरजबा पार्क बच्चों और बुजुर्गों के लिए स्विमिंग, बोटिंग और बगीचों का आनंद लेने का एक शानदार स्थान है। गांव ने लगभग 50 बीघा जमीन हरी घास उगाने के लिए आरक्षित की है, ताकि स्थानीय पशुपालकों को सालभर चारे की उपलब्धता बनी रहे। आश्चर्य की बात यह है कि 1972 से यहां भूमिगत जल निकासी प्रणाली काम कर रही है, जो आज भी भारत के कई शहरों की पहुँच से बाहर है।
बैंकिंग और निवेश का हब: धर्मज की आर्थिक ताकत
सिर्फ 17 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले और 11,333 की आबादी वाले इस छोटे से गांव में 11 बैंक शाखाएं हैं, जिनमें सरकारी, निजी और सहकारी बैंक शामिल हैं। इन बैंकों में 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की जमा राशि है, जो धर्मज को एक “निवेशकों का गांव” बनाती है। गांव का बैंकिंग इतिहास भी काफी समृद्ध है। 1959 में यहां देना बैंक की पहली शाखा खोली गई, और 1969 में ग्राम सहकारी बैंक की स्थापना हुई, जिसके पहले अध्यक्ष एचएम पटेल बने, जो बाद में भारत के वित्त मंत्री भी बने।
लग्जरी गाड़ियां और आलीशान घर: एक अनोखी जीवनशैली
धर्मज की सड़कों पर मर्सिडीज, ऑडी, बीएमडब्ल्यू जैसी लग्जरी कारें आम दिखाई देती हैं। यहां के घरों की वास्तुकला भी खासी दिलचस्प है। कई मकानों के नाम विदेशों से जुड़े हुए हैं, जैसे ‘रोडेशिया हाउस’ या ‘फिजी रेजिडेंस’, जो बताते हैं कि किस परिवार की जड़ें किस देश से जुड़ी हैं। यहां के कब्रिस्तान में लगी दान की पट्टिकाएं भी खास हैं, जिन पर रकम अक्सर शिलिंग (अफ्रीकी मुद्रा) में लिखी होती है, जो धर्मज के ऐतिहासिक वैश्विक संबंधों की गवाही देती हैं।
स्वावलंबी पंचायत: देशभर के लिए एक मिसाल
धर्मज की सबसे बड़ी शक्ति इसकी आत्मनिर्भर पंचायत व्यवस्था है। यहां पंचायत केवल सरकारी सहायता पर निर्भर नहीं है, बल्कि गांव के प्रवासी भारतीय विकास कार्यों में सक्रिय रूप से आर्थिक योगदान देते हैं। इसी कारण गांव में स्कूल, अस्पताल, पार्क, जल निकासी और सड़कें सभी आधुनिक स्तर के हैं। हर साल 12 जनवरी को ‘धर्मज दिवस’ मनाया जाता है, जब दुनिया भर से एनआरआई अपने गांव के इस गौरवशाली उत्सव में शामिल होने के लिए लौटते हैं। यह आयोजन गांव की एकता और गर्व का प्रतीक बन गया है।
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