“ऑपरेशन ब्लू स्टार: एक भूल, जिसकी कीमत इंदिरा गांधी ने जान देकर चुकाई”
पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने 1984 के विवादास्पद ऑपरेशन को बताया गलत, पर कहा, ‘दोष केवल इंदिरा गांधी का नहीं’
नई दिल्ली: 1984 में अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में आतंकवादियों के खिलाफ चलाया गया सैन्य अभियान, ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’, को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने एक बार फिर अपनी राय व्यक्त की है। उन्होंने इस कार्रवाई को “गलत तरीका” करार दिया है, और साथ ही कहा है कि इसकी भारी कीमत पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।
चिदंबरम ने यह बात हिमाचल प्रदेश के कसौली में आयोजित खुशवंत सिंह साहित्य महोत्सव में पत्रकार हरिंदर बावेजा की पुस्तक ‘दे विल शूट यू, मैडम’ पर चर्चा के दौरान कही।
“सामूहिक निर्णय था, केवल इंदिरा गांधी दोषी नहीं”: चिदंबरम का पक्ष
पूर्व केंद्रीय गृह एवं वित्त मंत्री ने स्वीकार किया कि ऑपरेशन ब्लू स्टार एक गलती थी। हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह केवल इंदिरा गांधी का निर्णय नहीं था, बल्कि सेना, पुलिस, खुफिया विभाग और सिविल सेवा का एक सम्मिलित फैसला था। इसलिए, केवल इंदिरा गांधी को ही इस पूरी गलती का दोषी ठहराया जाना अनुचित है।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “स्वर्ण मंदिर को पुनः प्राप्त करने का यह गलत तरीका था… सभी उग्रवादियों को वापस लाने और पकड़ने का एक तरीका था। ब्लू स्टार गलत तरीका था।”
चिदंबरम ने आगे कहा, “मैं मानता हूं कि श्रीमती गांधी ने उस गलती की कीमत अपनी जान देकर चुकाई, लेकिन वह गलती सेना, पुलिस, खुफिया विभाग और सिविल सेवा का मिला-जुला फैसला था। हम इसके लिए सिर्फ़ श्रीमती गांधी को ज़िम्मेदार नहीं ठहरा सकते।”
ऑपरेशन ब्लू स्टार: एक खूनी अध्याय
यह सैन्य कार्रवाई 1 जून से 8 जून, 1984 के बीच संचालित हुई थी। तत्कालीन इंदिरा गांधी सरकार का उद्देश्य पंजाब में कट्टरपंथी प्रचारक जरनैल सिंह भिंडरावाले के नेतृत्व वाले अलगाववादी आंदोलन को कुचलना था।
भारतीय सेना ने सिख धर्म के सबसे पवित्र स्थलों में से एक, स्वर्ण मंदिर परिसर में प्रवेश किया, जहां भिंडरावाले और उनके समर्थक छिपे हुए थे। इस कार्रवाई में जरनैल सिंह भिंडरावाले मारा गया, और स्वर्ण मंदिर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा, अकाल तख्त, को भारी क्षति पहुंची। सैन्य कार्रवाई के दौरान अकाल तख्त मलबे में बदल गया था, जिसने सिख समुदाय में भारी रोष उत्पन्न कर दिया था।
परिणाम: हत्या और दंगे
ऑपरेशन ब्लू स्टार के कुछ महीनों बाद, इंदिरा गांधी की उनके सिख अंगरक्षकों द्वारा गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस हत्या के बाद, देश भर में सिखों के खिलाफ व्यापक हिंसा भड़क उठी। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली और अन्य शहरों में 3,000 से अधिक सिख मारे गए थे। कई कांग्रेस नेताओं पर इस हिंसा को भड़काने के आरोप भी लगे थे।
कांग्रेस पार्टी को 1984 के दंगों को संभालने के तरीके को लेकर लगातार आलोचना का सामना करना पड़ा है। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की “जब कोई बड़ा पेड़ गिरता है, तो ज़मीन हिलती है” वाली टिप्पणी पर भी काफी विवाद हुआ था। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अक्सर 1984 के दंगों के मुद्दे पर कांग्रेस पर हमलावर रही है।
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