AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने ईद मिलाद-उन-नबी के कार्यक्रम में कई संवेदनशील मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। हिजाब विवाद और संविधान को लेकर उनके बयान ने राजनीतिक बहस तेज कर दी, वहीं हैदराबाद में बढ़ते नशे और हत्या के मामलों पर उन्होंने सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग की।
हिजाब फैसले पर ओवैसी की आपत्ति
हैदराबाद के दारुस्सलाम में आयोजित ‘जलसा-ए-रहमतुल-लिल-आलमीन’ में असदुद्दीन ओवैसी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के हिजाब संबंधी आदेश पर असहमति जताई। उन्होंने कहा कि उनकी नजर में यह आदेश इस्लाम पर सीधा हमला और मुसलमानों की धार्मिक प्रथाओं में दखल है।
ओवैसी ने यह भी कहा कि मामला सुप्रीम कोर्ट में फैसले के लिए सुरक्षित है। ऐसे में इस मुद्दे पर आगे की कानूनी प्रक्रिया पर सबकी नजर रहेगी।
संविधान और मनुस्मृति का मुद्दा
अपने संबोधन में ओवैसी ने RSS और BJP पर वैचारिक हमला करते हुए संविधान और मनुस्मृति का मुद्दा उठाया। उन्होंने दावा किया कि संविधान अपनाए जाने के कुछ दिनों बाद RSS के मुखपत्र में इसकी आलोचना की गई थी।
ओवैसी ने आरोप लगाया कि संघ से जुड़े लोगों को डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा तैयार संविधान से आपत्ति थी। हालांकि, इन ऐतिहासिक दावों पर राजनीतिक और वैचारिक बहस लंबे समय से होती रही है।
सावरकर और स्वतंत्रता आंदोलन का जिक्र
ओवैसी ने हिंदुत्व विचारक वी.डी. सावरकर और मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों की तुलना करते हुए अपने तर्क रखे। उन्होंने सावरकर के जेल से लिखे पत्रों का उल्लेख किया और इसके विपरीत अल्लामा फजल-ए-हक खैराबादी के संघर्ष को सामने रखा।
उन्होंने अंडमान की सेलुलर जेल से जुड़े इतिहास का भी जिक्र किया और हैदराबाद के मौलवी अलाउद्दीन को पहला कैदी बताया। उनके इस बयान ने स्वतंत्रता आंदोलन में विभिन्न समुदायों की भूमिका को लेकर राजनीतिक चर्चा को फिर हवा दे दी।
SIR को लेकर कार्यकर्ताओं से अपील
दक्षिणी राज्यों में चल रही SIR प्रक्रिया का जिक्र करते हुए ओवैसी ने लोगों से घबराने की बजाय कानूनी प्रक्रिया को समझने की अपील की। उन्होंने कहा कि अगर किसी व्यक्ति को नोटिस मिलता है तो उसे परेशान होने की जरूरत नहीं है।
ओवैसी ने भरोसा दिलाया कि उनकी पार्टी के कार्यकर्ता ऐसे लोगों की मदद के लिए मौजूद रहेंगे। मतदाता सूची से जुड़े मुद्दे इस समय कई राज्यों में राजनीतिक बहस का हिस्सा बने हुए हैं।
हैदराबाद में नशे पर चिंता
ओवैसी ने हैदराबाद में बढ़ती नशे की समस्या पर भी चिंता जताई। उन्होंने युवाओं से नशे से दूर रहने की अपील करते हुए कहा कि जरूरत पड़ने पर मदद मांगने में संकोच नहीं करना चाहिए।
उन्होंने अपने व्यक्तिगत अनुभव का उल्लेख करते हुए बताया कि वह कभी सिगरेट पीते थे, लेकिन अब इसे छोड़ चुके हैं। उनका संदेश साफ था—नशे से बाहर निकलने के लिए समय पर मदद लेना कमजोरी नहीं, बल्कि समझदारी है।
हत्या के मामलों पर मांगी तेज कार्रवाई
हैदराबाद में लगातार हो रही हत्याओं को लेकर AIMIM प्रमुख ने तेलंगाना सरकार से विशेष ‘एंटी-मर्डर स्क्वाड’ बनाने की मांग की। उन्होंने हत्या के मामलों की सुनवाई जल्द पूरी करने के लिए विशेष अदालतों की जरूरत भी बताई।
ओवैसी का कहना है कि अपराध के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई तभी दिखाई देगी, जब जांच और न्याय दोनों समयबद्ध हों। उनके संबोधन में राजनीति के साथ सामाजिक सुरक्षा का मुद्दा भी प्रमुखता से सामने आया।
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