संसद के शीतकालीन सत्र का दूसरा दिन: एसआईआर पर घमासान, कामकाज ठप
संसद के शीतकालीन सत्र का दूसरा दिन भी हंगामेदार रहा। सरकार जहां कुछ महत्वपूर्ण विधेयकों को सदन में पेश करने की तैयारी में थी, वहीं विपक्ष मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के मुद्दे पर अड़ा रहा। विपक्षी सांसदों के लगातार हंगामे और नारेबाजी के चलते राज्यसभा और लोकसभा दोनों की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी।
लोकसभा में ‘वोट चोर, गद्दी छोड़ो’ के नारे
सुबह 11 बजे जैसे ही लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी सांसदों ने केंद्र सरकार के खिलाफ “वोट चोर, गद्दी छोड़ो” के नारे लगाने शुरू कर दिए। वे एसआईआर पर तत्काल चर्चा की मांग कर रहे थे। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदस्यों से मर्यादा बनाए रखने का आह्वान करते हुए कहा कि पूरा देश सदन के अंदर और बाहर हो रहे विरोध प्रदर्शन पर नजर रख रहा है। उन्होंने प्रश्नकाल को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इस तरह का विरोध संसद या देश के हित में नहीं है।
विधायी कार्य पर संकट, सत्र की शुरुआत से ही व्यवधान
विपक्ष का हंगामा लगातार दूसरे दिन भी जारी रहा। सोमवार को भी सत्र में बार-बार स्थगन हुआ था और विधायी कार्य एक घंटे से भी कम समय के लिए हो पाया था। प्रश्नकाल के दौरान, ज़ोरदार नारेबाजी के बावजूद मंत्रियों ने सवालों के जवाब दिए। पश्चिम बंगाल में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) और पशुपालन विकास कोष (एएचआईडीएफ) के तहत आवंटित धनराशि से संबंधित एक प्रश्न का उत्तर देते हुए, केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने धनराशि का विवरण प्रस्तुत किया।
विकसित भारत के लिए राज्यों के विकास की आवश्यकता पर जोर
केंद्रीय मंत्री ने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए हर राज्य का विकास आवश्यक है। उन्होंने बताया कि इसी उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश भर में मत्स्य उद्योग में क्रांति लाने के लिए पीएमएमएसवाई की शुरुआत की है, हालांकि पश्चिम बंगाल ने इसका समर्थन नहीं किया है।
सत्र का पूरा कार्यक्रम
संसद का शीतकालीन सत्र 1 दिसंबर को शुरू हुआ है और 19 दिसंबर को समाप्त होगा। लेकिन पहले दो दिन से ही विधायी कार्यों में व्यवधान देखने को मिल रहा है, जिससे सत्र के बाकी दिनों पर भी सवालिया निशान लग गया है।
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