भारत के गौरवशाली ज्ञान को डिजिटल युग में नया आयाम: प्रधानमंत्री मोदी ने ‘ज्ञान भारतम पोर्टल’ का किया शुभारंभ
भारत के समृद्ध ज्ञान और गौरवशाली परंपरा को डिजिटल युग में नया जीवन देने के लिए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘ज्ञान भारतम पोर्टल’ का ऐतिहासिक शुभारंभ किया। यह एक समर्पित डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसका लक्ष्य पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण, संरक्षण और सार्वजनिक पहुंच को अभूतपूर्व गति प्रदान करना है।
इस अवसर पर, प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि उन्होंने कुछ ही दिन पूर्व ‘ज्ञान भारतम मिशन’ की घोषणा की थी, और आज इसी के तहत ‘ज्ञान भारतम अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन’ का भव्य आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह किसी सरकारी या अकादमिक आयोजन से कहीं बढ़कर, भारतीय संस्कृति, साहित्य और चेतना का एक भव्य उद्घोष है। इस महत्वपूर्ण मिशन के शुभारंभ पर, प्रधानमंत्री ने पूरे देश को अपनी हार्दिक बधाई दी।
प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि दिल्ली का विज्ञान भवन आज भारत के स्वर्णिम अतीत के पुनर्जागरण का ऐतिहासिक साक्षी बन रहा है। उन्होंने इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया कि ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ की घोषणा के महज कुछ ही दिनों के भीतर, आज न केवल ‘ज्ञान भारतम् इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस’ का भव्य आयोजन हो रहा है, बल्कि इससे संबंधित पोर्टल भी लॉन्च कर दिया गया है। उन्होंने एक बार फिर दोहराया कि यह मात्र एक सरकारी या अकादमिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत की अनंत संस्कृति, समृद्ध साहित्य और गहन चेतना का जीवंत उद्घोष बनने की दिशा में एक सशक्त कदम है।
प्रधानमंत्री ने इस मिशन के विशाल दायरे को स्पष्ट करते हुए कहा कि ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ के माध्यम से हम हजारों पीढ़ियों के गहन चिंतन-मनन, भारत के महान आचार्यों व विद्वानों के बोध-शोध, हमारी अद्वितीय ज्ञान परंपराओं और अमूल्य वैज्ञानिक धरोहरों को डिजिटाइज़ करने जा रहे हैं। उन्होंने गर्व से बताया कि भारत आज दुनिया के सबसे बड़े हस्तलिपि संग्रह का धनी है, जिसमें अनुमानतः 1 करोड़ पांडुलिपियाँ शामिल हैं। सदियों के इतिहास के क्रूर थपेड़ों और विभीषिकाओं में लाखों हस्तलिपियाँ भले ही काल के गाल में समा गईं या लुप्त हो गईं, लेकिन जो शेष बची हैं, वे इस बात की जीवंत साक्षी हैं कि ज्ञान और विज्ञान के पठन-पाठन के प्रति हमारे पूर्वजों की निष्ठा कितनी गहरी और व्यापक थी।
अपने संबोधन के अंत में, प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय ज्ञान परंपरा की अटूट समृद्धि का रहस्य उजागर करते हुए बताया कि इसकी नींव चार मुख्य स्तंभों पर टिकी है: संरक्षण, नवाचार, परिवर्धन और अनुकूलन। उन्होंने भारत को ‘स्वयं में एक जीवंत प्रवाह’ बताया, जिसका निर्माण उसके शाश्वत विचारों, उच्च आदर्शों और गहन मूल्यों से हुआ है। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि हमारी प्राचीन पांडुलिपियाँ केवल पुराने दस्तावेज़ नहीं, बल्कि भारत के इसी निरंतर प्रवाह की जीवंत रेखाएँ हैं। ये अमूल्य पांडुलिपियाँ हमारी ‘विविधता में एकता’ के भव्य घोषणा पत्र के समान हैं, जो हमें अपनी जड़ों से जोड़े रखती हैं और भविष्य के लिए प्रेरणा देती हैं।
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