राजनीतिक उठापटक: आरसीपी सिंह की जाति और जेडीयू में ‘नो एंट्री’ का विवाद

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RCP Singh Caste: कौन हैं आरसीपी सिंह, क्या है उनकी जाति, JDU में उनकी ‘नो एंट्री’ पर क्यों मचा है सियासी बवाल | Who is RCP Singh Caste bureaucrat to politician Career why jdu no entry controversy

India

oi-Pallavi Kumari


Published: Sunday, January 18, 2026, 19:24 [IST]

RCP Singh Row: बिहार की सियासत में एक बार फिर आरसीपी सिंह का नाम सुर्खियों में है। वजह है जनता दल यूनाइटेड (JDU) में उनकी संभावित वापसी को लेकर उठा विवाद, जिस पर अब पार्टी नेतृत्व ने साफ शब्दों में ब्रेक लगा दिया है।

JDU के सीनियर नेता और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह के बयान के बाद यह लगभग तय हो गया है कि आरसीपी सिंह की पार्टी में वापसी फिलहाल नामुमकिन है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर कौन हैं आरसीपी सिंह, क्या है उनकी जाति और क्यों उनकी मौजूदगी को लेकर JDU में इतना बवाल मचा हुआ है।

JDU में आरसीपी सिंह की ‘नो एंट्री’

आरसीपी सिंह की वापसी को लेकर चल रही अटकलों पर उस वक्त विराम लग गया, जब केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने दो टूक कहा कि JDU में उनके लिए कोई जगह नहीं है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जिन्होंने पार्टी को कमजोर किया, उन्हें वापस लाने का कोई सवाल ही नहीं उठता। ललन सिंह का यह बयान ऐसे समय आया, जब पार्टी के भीतर आरसीपी सिंह की एंट्री को लेकर चर्चाएं तेज थीं।

ललन सिंह ने आरसीपी सिंह को लेकर क्या-क्या कहा?

ललन सिंह ने आरसीपी सिंह पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि जिस दौर में पार्टी के पास 72 सीटें थीं, उसी दौरान JDU 42 सीटों पर सिमट गई। उन्होंने सवाल उठाया कि पार्टी को 72 से 42 सीटों तक पहुंचाने वाले लोग अब वापस आकर क्या करेंगे। उनके मुताबिक JDU को दोबारा खड़ा करने का काम पार्टी कार्यकर्ताओं और बिहार की जनता ने किया है।

ललन सिंह ने यह भी कहा कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में JDU ने दोबारा मजबूती हासिल की। 42 सीटों से बढ़कर पार्टी 85 सीटों तक पहुंची और इसके पीछे समर्पित कार्यकर्ताओं और जनता की मेहनत रही। ऐसे में पार्टी को कमजोर करने वालों की कोई जरूरत नहीं है।

आरसीपी सिंह के बयान से बढ़ी थीं अटकलें

दरअसल, कुछ दिन पहले आरसीपी सिंह ने बयान दिया था कि वे नीतीश कुमार से अलग नहीं हैं और उनका रिश्ता करीब 25 साल पुराना है। उन्होंने नीतीश कुमार को अपना अभिभावक बताया था। इसी बयान के बाद JDU के अंदर उनकी वापसी को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई थीं।

इन अटकलों को और हवा तब मिली, जब पटेल सेवा संघ के दही-चूड़ा भोज में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और आरसीपी सिंह दोनों शामिल हुए। हालांकि दोनों की एंट्री अलग-अलग समय पर हुई, लेकिन कार्यक्रम के बाद आरसीपी सिंह के बयान ने सियासी हलचल बढ़ा दी। उन्होंने कहा कि उनका रिश्ता किसी पद या मौके से जुड़ा नहीं है।

Who is RCP Singh: कौन हैं आरसीपी सिंह, क्या है उनकी जाति

63 वर्षीय आरसीपी सिंह मूल रूप से बिहार के नालंदा जिले के रहने वाले हैं, जहां से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी आते हैं। दोनों कुर्मी समाज से ताल्लुक रखते हैं।

RCP Singh Caste: आरसीपी सिंह कुर्मी जाति के हैं, जो बिहार की राजनीति में एक प्रभावशाली वर्ग माना जाता है। यही वजह है कि उनकी भूमिका को हमेशा जातीय समीकरणों से जोड़कर देखा जाता रहा है।

IAS से राजनीति तक का सफर (RCP Singh Career)

राजनीति में आने से पहले आरसीपी सिंह उत्तर प्रदेश कैडर के IAS अधिकारी रह चुके हैं। 1996 में जब नीतीश कुमार अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में मंत्री थे, तब उनकी नजर आरसीपी सिंह पर पड़ी। उस वक्त आरसीपी सिंह केंद्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा के निजी सचिव थे। बाद में नीतीश कुमार ने उन्हें अपना विशेष सचिव बनाया।

2005 में जब नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री बने, तो आरसीपी सिंह को दिल्ली से बुलाकर प्रधान सचिव नियुक्त किया गया। 2005 से 2010 तक वे इस पद पर रहे और इसी दौरान पार्टी में उनकी पकड़ मजबूत होती चली गई।

2010 में आरसीपी सिंह ने VRS लिया और JDU ने उन्हें राज्यसभा भेजा। 2016 में उन्हें दोबारा राज्यसभा सांसद बनाया गया। दिसंबर 2020 में वे JDU के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने और 2021 में नरेंद्र मोदी सरकार में केंद्रीय इस्पात मंत्री भी बने। हालांकि बीजेपी से नजदीकी और पार्टी को कमजोर करने के आरोपों के बीच 2022 में उन्हें JDU से बाहर कर दिया गया।

बीजेपी से जन सुराज तक

मई 2023 में आरसीपी सिंह बीजेपी में शामिल हुए, लेकिन जब जनवरी 2024 में नीतीश कुमार एनडीए में लौटे, तो बीजेपी ने भी उन्हें किनारे कर दिया। इसके बाद उन्होंने अपनी पार्टी ‘आप सबकी आवाज’ बनाई और 2025 विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान किया। बाद में उनकी पार्टी का विलय प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी में हो गया और फिलहाल वे उसी से जुड़े हैं।

फिलहाल बंद हुए सारे रास्ते

ललन सिंह के सख्त बयान के बाद यह साफ हो गया है कि आरसीपी सिंह की JDU में वापसी की राह फिलहाल पूरी तरह बंद है। जातीय पहचान, प्रशासनिक अनुभव और लंबा राजनीतिक सफर होने के बावजूद JDU नेतृत्व पुराने विवादों को दोहराने के मूड में नहीं दिख रहा। यही वजह है कि आरसीपी सिंह एक बार फिर बिहार की राजनीति के सबसे चर्चित लेकिन सबसे अलग-थलग चेहरों में गिने जा रहे हैं।

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English summary

Who is RCP Singh Caste bureaucrat to politician Career why jdu no entry controversy


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