शीला दीक्षित के भरोसेमंद अफसर राकेश मेहता की मौत ने नौकरशाही और राजनीतिक गलियारों को गहरे सदमे में डाला

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PEEYUSH UPADHYAY
पीयुष उपाध्याय एक अनुभवी समाचार संपादक हैं, जो Aware Media Network के लिए देश-दुनिया की प्रमुख खबरों, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग सुनिश्चित करते हैं। उनका अनुभव...
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दिल्ली को आधुनिक बनाने वाले वरिष्ठ नौकरशाह राकेश मेहता की मौत ने प्रशासनिक गलियारों को स्तब्ध कर दिया। शीला दीक्षित सरकार में अहम भूमिका निभाने वाले इस पूर्व मुख्य सचिव के निधन के साथ उनकी उपलब्धियों, निजी जीवन और आखिरी दिनों को लेकर कई सवाल भी सामने आए हैं।

दिल्ली के पूर्व मुख्य सचिव का निधन

दिल्ली के पूर्व मुख्य सचिव राकेश मेहता की नोएडा के सेक्टर-82 स्थित केंद्रीय विहार-2 सोसाइटी के किराए के फ्लैट में मौत हो गई। वह 75 वर्ष के थे। पुलिस के अनुसार, उन्होंने कथित तौर पर आत्महत्या की। मौके से मिले एक पन्ने के अंग्रेजी नोट में उन्होंने स्वास्थ्य समस्याओं और मानसिक तनाव का जिक्र किया तथा किसी को अपनी मौत के लिए जिम्मेदार नहीं बताया।

उनकी मौत ने दिल्ली के प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में शोक की लहर पैदा कर दी है।

सेंट स्टीफंस से LSE तक पढ़ाई

देहरादून में जन्मे राकेश मेहता का शैक्षणिक सफर बेहद प्रभावशाली रहा। उन्होंने सेंट स्टीफंस कॉलेज से स्नातक और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से MSc की डिग्री हासिल की।

1975 में उनका चयन IAS में हुआ और उन्हें AGMUT कैडर मिला। तीन दशक से ज्यादा के प्रशासनिक करियर में उन्होंने दिल्ली सरकार और MCD में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं।

शीला दीक्षित के भरोसेमंद अधिकारी

2007 से नवंबर 2010 तक दिल्ली के मुख्य सचिव रहे मेहता को तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के भरोसेमंद अधिकारियों में गिना जाता था। दिल्ली की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था, बिजली सुधार और नगर निकाय से जुड़े कई बदलावों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

ब्लू लाइन बसों को हटाकर लो-फ्लोर DTC बसों की शुरुआत, बिजली क्षेत्र में सुधार और MCD के प्रॉपर्टी टैक्स में यूनिट एरिया सिस्टम जैसे फैसलों से उनका नाम जुड़ा रहा।

CWG की तैयारियों में अहम भूमिका

2010 राष्ट्रमंडल खेलों से पहले दिल्ली में बुनियादी ढांचे को समय पर तैयार करना बड़ी चुनौती थी। मेहता ने फ्लाइओवर, मेट्रो विस्तार और स्टेडियम से जुड़े कामों की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उनके साथ काम कर चुके अधिकारियों के मुताबिक वह फाइलों को अनावश्यक रूप से रोकने के खिलाफ थे और फैसलों को तेजी से लागू कराने पर जोर देते थे।

परिवार से अलग रह रहे थे

रिटायरमेंट के बाद मेहता कुछ समय परिवार के साथ रहे। बताया गया कि पिछले करीब पांच वर्षों से वह नोएडा में अकेले रह रहे थे। उनकी पत्नी सुमति मेहता भी सेवानिवृत्त IAS अधिकारी हैं। उनका बेटा देहरादून में मां के साथ रहता था, जबकि बेटी लंदन में अपने परिवार के साथ रहती है।

परिवार के सदस्य उनसे नियमित संपर्क में रहते थे।

आखिरी दिन और बड़ा सवाल

शनिवार रात पत्नी से फोन पर उनकी आखिरी बातचीत हुई थी। रविवार को कई बार फोन का जवाब नहीं मिलने पर परिवार ने सोसाइटी के सुरक्षा कर्मी से फ्लैट देखने को कहा। इसके बाद घटना की जानकारी पुलिस को दी गई। सोमवार को अंतिम संस्कार किया गया।

राकेश मेहता की कहानी एक ऐसे अधिकारी की है जिसने दशकों तक सार्वजनिक व्यवस्था को बेहतर बनाने में भूमिका निभाई। उनकी मौत यह सोचने पर मजबूर करती है कि उपलब्धियों और सार्वजनिक जीवन की चमक के पीछे किसी व्यक्ति की निजी जिंदगी में चल रही परेशानियों को समझना कितना जरूरी है। ऐसे मामलों में संवेदना के साथ मानसिक स्वास्थ्य और अकेलेपन पर खुली बातचीत भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।


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पीयुष उपाध्याय एक अनुभवी समाचार संपादक हैं, जो Aware Media Network के लिए देश-दुनिया की प्रमुख खबरों, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग सुनिश्चित करते हैं। उनका अनुभव पत्रकारिता में 7+ वर्षों का है और वे निष्पक्ष, भरोसेमंद और समय पर समाचार प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कई पुरस्कार और मान्यता प्राप्त की है, जिनमें 2022 में “Best Investigative Journalist” और 2021 में “Top 10 Editors in Uttarakhand” शामिल हैं।
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