रूस, अमेरिका और यूक्रेन के बीच UAE में ऐतिहासिक वार्ता: शांति की उम्मीदों को मिली नई उड़ान

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शांति की जागी उम्मीद: UAE में रूस-US-यूक्रेन की पहली त्रिपक्षीय बैठक कल, जेलेंस्की ने की पुष्टि | First trilateral meeting of Russia-US-Ukraine in UAE tomorrow, Zelensky confirmed

यहाँ दिया गया आर्टिकल एक नए, सम्मोहक और दिलचस्प रूप में प्रस्तुत है, जिसकी मूल सामग्री और लंबाई में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है:

वैश्विक मंच

oi-भावना पांडे


अपडेट किया गया: गुरुवार, 22 जनवरी, 2026, 23:28 [IST]

यूक्रेन,
अमेरिका
और
रूस
के
बीच
पहली
तकनीकी
स्तर
की
त्रिपक्षीय
बैठक
का
आयोजन
23
और
24
जनवरी
को
संयुक्त
अरब
अमीरात
(UAE)
में
किया
जाएगा।
यूक्रेनी
राष्ट्रपति
वलोडिमिर
ज़ेलेंस्की
ने
दावोस
में
विश्व
आर्थिक
मंच
(WEF)
के
दौरान
इस
महत्वपूर्ण
बैठक
की
घोषणा
की।

ज़ेलेंस्की
ने
बताया
कि
यह
तीनों
देशों
के
बीच
इस
प्रारूप
में
आयोजित
होने
वाली
पहली
बैठक
है,
जिसकी
उन्हें
उम्मीद
है
कि
यह
जारी
युद्ध
को
समाप्त
करने
में
अहम
भूमिका
निभाएगी।
उन्होंने
कहा,
“कल
और
परसों
हमारी
त्रिपक्षीय
बैठक
होगी,
क्योंकि
संवाद
होने
से
बेहतर
कुछ
नहीं
है।”
यह
टिप्पणी
अमेरिकी
राष्ट्रपति
डोनाल्ड
ट्रम्प
के
साथ
उनकी
एक
घंटे
की
मुलाकात
के
बाद
आई,
जिसे
ट्रम्प
ने
“अच्छा”
बताया
था।

जेलेंस्की
ने
बैठक
को
लेकर
क्या
उम्मीदें
बांधीं?

ज़ेलेंस्की
ने
आगे
बताया
कि
यूक्रेनी
टीम
ने
गुरुवार
को
अमेरिकियों
से
मुलाकात
की
और
इसके
बाद
अमेरिकी
टीम
रूस
के
लिए
रवाना
होगी।
उन्होंने
अपने
अंदाज
में
कहा,
“हमारे
लोग
आज
अमेरिकियों
से
मिल
रहे
हैं,
फिर
अमेरिकी
कल
-आज
रात

कब,
मुझे
नहीं
पता,
शायद
पुतिन
सो
रहे
हैं।
आपने
कहा
था
कि
कोई
नहीं
जानता
कि
उनके
दिमाग
में
क्या
चल
रहा
है।”

क्या
यह
घोषणा
डोनाल्ड
ट्रम्प
से
मुलाकात
के
बाद
हुई?

ज़ेलेंस्की
ने
इस
बात
पर
जोर
दिया
कि
“रूसी
लोगों
को
समझौते
के
लिए
तैयार
रहना
चाहिए”।
उन्होंने
स्पष्ट
किया,
“सिर्फ
यूक्रेन
ही
नहीं,
सभी
को
तैयार
रहना
चाहिए,
और
यह
हमारे
लिए
महत्वपूर्ण
है।
इसलिए
हम
देखेंगे
कि
परिणाम
क्या
होंगे।”
हालांकि,
यूक्रेनी
नेता
ने
बातचीत
के
फॉर्मेट
या
अधिकारियों
के
सीधे
संवाद
के
बारे
में
कोई
विस्तृत
जानकारी
नहीं
दी।

ज़ेलेंस्की
ने
यूरोपीय
देशों
की
सुरक्षा
के
लिए
अमेरिका
पर
अत्यधिक
निर्भरता
की
भी
आलोचना
की।
उन्होंने
जोर
देकर
कहा
कि
महाद्वीप
को
अपनी
स्वयं
की
एकीकृत
सशस्त्र
सेनाओं
की
आवश्यकता
है
जो
वास्तव
में
उसकी
रक्षा
कर
सकें।
उनका
मानना
है
कि
वर्तमान
निर्भरता
अस्थिर
है।

ज़ेलेंस्की
के
अनुसार,
“यूरोप
को
संयुक्त
सशस्त्र
बलों
की
आवश्यकता
है,
ऐसी
ताकतों
की
जो
वास्तव
में
आज
यूरोप
की
रक्षा
कर
सकें।
यूरोप
केवल
इस
विश्वास
पर
निर्भर
करता
है
कि
यदि
खतरा
आता
है,
तो
नाटो
कार्रवाई
करेगा,
लेकिन
किसी
ने
वास्तव
में
गठबंधन
को
कार्रवाई
में
नहीं
देखा
है।”

उन्होंने
उस
स्थिति
पर
भी
सवाल
उठाया
जब
अमेरिका
मदद
नहीं
करेगा,
यह
कहते
हुए
कि
नाटो
का
अस्तित्व
इस
विश्वास
पर
टिका
है
कि
संयुक्त
राज्य
अमेरिका
कार्रवाई
करेगा
और
अलग
नहीं
खड़ा
रहेगा।
ज़ेलेंस्की
ने
चेतावनी
दी,
“लेकिन
अगर
ऐसा
नहीं
होता
है
तो
क्या?
मेरा
विश्वास
करें,
यह
सवाल
हर
यूरोपीय
नेता
के
दिमाग
में
छाया
हुआ
है।”

यूक्रेनी
राष्ट्रपति
ने
एक
महत्वपूर्ण
बात
रखी:
यदि
यूक्रेन
नाटो
का
सदस्य
होता,
तो
वह
ग्रीनलैंड
के
पास
रूसी
जहाजों
को
डुबोने
में
गठबंधन
की
मदद
कर
सकता
था।
उन्होंने
दावा
किया,
“हम
जानते
हैं
कि
क्या
करना
है।
यदि
रूसी
युद्धपोत
ग्रीनलैंड
के
पास
स्वतंत्र
रूप
से
नौकायन
कर
रहे
हैं,
तो
यूक्रेन
मदद
कर
सकता
है।
हमारे
पास
विशेषज्ञता
और
हथियार
हैं।”

अपनी
क्षमताएं
बताते
हुए
ज़ेलेंस्की
ने
आगे
कहा,
“हम
यह
सुनिश्चित
कर
सकते
हैं
कि
उनमें
से
एक
भी
जहाज

बचे।
वे
ग्रीनलैंड
के
पास
वैसे
ही
डूब
सकते
हैं
जैसे
वे
क्रीमिया
के
पास
डूबते
हैं।”
उन्होंने
अपनी
बात
दोहराई,
“हम
जानते
हैं
कि
अगर
हमसे
पूछा
जाए
और
यदि
यूक्रेन
नाटो
में
होता
तो
वहां
कैसे
लड़ना
है।”

ज़ेलेंस्की
ने
दुख
व्यक्त
करते
हुए
कहा,
“लेकिन
हम
नहीं
हैं।
हम
रूसी
जहाजों
की
समस्या
का
समाधान
कर
देते।”
यह
टिप्पणी
नाटो
में
यूक्रेन
की
अनुपस्थिति
के
कारण
खोए
हुए
अवसर
को
उजागर
करती
है।

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