बिहार में वीआईपी की चुनावी हुंकार: 15 उम्मीदवारों की सूची जारी, पिछड़ों पर खास नजर
आगामी बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए राजनीतिक बिसात बिछने लगी है। इस कड़ी में, विपक्षी गठबंधन के एक प्रमुख स्तंभ, विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) ने 15 उम्मीदवारों की सूची जारी कर चुनावी रण में अपनी उपस्थिति का आगाज किया है। पार्टी का मुख्य ध्यान पिछड़े और हाशिए पर पड़े समुदायों को सशक्त बनाने पर केंद्रित है, जो उनकी चुनावी रणनीति का एक अहम हिस्सा है।
सोमवार को वीआईपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता देव ज्योति ने इस महत्वपूर्ण सूची की घोषणा करते हुए बताया कि पार्टी अध्यक्ष संतोष सहनी दरभंगा जिले के गौरा बौराम से चुनावी मैदान में उतरेंगे। वहीं, आलमनगर से नवीन कुमार, कुशेश्वरस्थान से गणेश भारती सदा और दरभंगा शहरी से उमेश सहनी को भी पार्टी ने अपना उम्मीदवार बनाया है।
अन्य प्रमुख चेहरे और चुनावी रणनीति
इस सूची में कई अन्य महत्वपूर्ण नाम भी शामिल हैं। भोगेंद्र सहनी (औराई), राकेश कुमार (बरूराज) और बिहार प्रदेश अध्यक्ष बाल गोविंद बिंद (चैनपुर) प्रमुखता से उभरे हैं। इनके अलावा, वीआईपी ने रणकौशल प्रताप सिंह (लौरिया), शशि भूषण सिंह (सुगौली), वरुण विजय (केसरिया), हरिनारायण प्रमाणिक (सिकटी), सौरव कुमार अग्रवाल (कटिहार), अर्पणा कुमारी मंडल (बिहपुर), प्रेम सागर (गोपालपुर) और बिंदु गुलाब यादव (बाबूबरही) को भी मैदान में उतारा है।
देव ज्योति ने विश्वास जताया कि वीआईपी पूरी शक्ति के साथ चुनाव लड़ेगी और बिहार में अगली सरकार बनाने में महागठबंधन को एक निर्णायक भूमिका निभाने में मदद करेगी। उन्होंने दावा किया कि जनता का मूड बदलाव के पक्ष में है और मतदाताओं का रुझान विपक्षी गठबंधन की ओर स्पष्ट रूप से दिख रहा है।
पार्टी की पूर्व सूची और आंतरिक चुनौतियां
यह पहली बार नहीं है जब वीआईपी ने उम्मीदवारों की सूची जारी की है। इससे पहले भी पार्टी दो अलग-अलग सूचियों में अपने उम्मीदवारों का ऐलान कर चुकी है। पहली सूची में राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष साहनी सहित छह नाम थे, जबकि दूसरी सूची में प्रदेश अध्यक्ष बाल गोविंद बिंद समेत पांच और चेहरे शामिल थे।
हालांकि, पार्टी को कुछ आंतरिक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है। हाल ही में, पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता राजेश साहनी, बिट्टू पासवान और पूर्व पार्टी अध्यक्ष राजेश प्रजापति अपने कई समर्थकों के साथ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गए। उन्होंने एनडीए की जीत सुनिश्चित करने के लिए पूरी निष्ठा से काम करने का संकल्प लिया है। यह घटनाक्रम वीआईपी के लिए एक राजनीतिक झटका है, लेकिन पार्टी अपनी चुनावी रणनीति पर अडिग है।
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