संचार साथी: जासूसी का उपकरण नहीं, बल्कि आपकी सुरक्षा का कवच!
भाजपा सांसद संबित पात्रा ने ‘संचार साथी’ ऐप को लेकर फैलाई जा रही गलत धारणाओं का खंडन करते हुए स्पष्ट किया है कि यह ऐप किसी भी प्रकार की सरकारी निगरानी के लिए नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह ऐप व्यक्तिगत डेटा, संदेशों या कॉल तक पहुँचने में असमर्थ है। इसका मुख्य उद्देश्य उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा को सुदृढ़ करना, धोखाधड़ी को रोकना और खोए या चोरी हुए मोबाइल फोन को ट्रैक कर उन्हें मालिक तक वापस पहुंचाना है।
पार्लियामेंट के शीतकालीन सत्र के दौरान, कांग्रेस पार्टी द्वारा संसद सदस्यों और कर्मचारियों का अपमान किए जाने के मुद्दे के साथ-साथ ‘संचार साथी’ पर भी चर्चा हुई। विपक्ष के सवालों के जवाब में पात्रा ने दृढ़ता से कहा, “क्या संचार साथी ऐप सरकारी जासूसी के लिए है? क्या सरकार आपकी जासूसी करना चाहती है? नहीं – नहीं – नहीं। सरकार किसी की जासूसी नहीं करना चाहती।”
विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा, “जो दुष्प्रचार के साथी हैं, वो संचार साथी को समझ नहीं पाएंगे। इसलिए उन दुष्प्रचार के साथियों को हम तथ्य बताएंगे, वो फिर भी समझ नहीं पाएंगे। मगर जनता-जनार्दन तक तथ्य पहुंचाना हमारा काम है।” उन्होंने दोहराया कि ‘संचार साथी’ का सरकार से कोई भी जासूसी संबंध नहीं है। यह ऐप आपके संदेश नहीं पढ़ सकता, आपके कॉल नहीं सुन सकता, और आपके निजी डेटा तक पहुँच नहीं सकता। इसका एकमात्र कार्य सुरक्षा प्रदान करना, धोखाधड़ी रोकना, चोरी हुए फोन को ट्रैक करना और उन्हें सही मालिक तक पहुंचाना है।
संबित पात्रा ने इस बात पर भी जोर दिया कि ‘संचार साथी’ के बारे में फैली भ्रांतियों को दूर करना आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह ऐप किसी भी तरह से सरकारी निगरानी का साधन नहीं है, बल्कि यह जनभागीदारी पर आधारित एक नागरिक सुरक्षा प्लेटफॉर्म है।
‘संचार साथी’ धोखाधड़ी वाले कॉल और स्पैम नंबरों की पहचान करने में भी सहायक है। इसके माध्यम से उपयोगकर्ता स्पैम और दुर्भावनापूर्ण लिंक की रिपोर्ट कर सकते हैं, जिससे उन्हें धोखाधड़ी से बचाया जा सके। मोबाइल फोन में IMEI डुप्लीकेशन के बढ़ते मामलों को देखते हुए, ‘संचार साथी’ इस समस्या से निपटने और खोए या चोरी हुए उपकरणों को पुनः प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
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