बालिका को न्याय: सौतेले पिता को आजीवन कारावास
गाजीपुर: शुक्रवार को पॉक्सो (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण) अधिनियम के तहत गठित विशेष अदालत ने एक रूह कंपा देने वाले मामले में फैसला सुनाया। अपनी एक वर्षीय सौतेली बेटी के साथ हुए दुष्कर्म के आरोपी सौतेले पिता को अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
अभियोजन पक्ष के वकील, प्रभु नारायण सिंह, ने बताया कि विशेष न्यायाधीश राम अवतार प्रसाद की अदालत ने यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया। इस जघन्य अपराध से जुड़ा मुकदमा अत्यंत कम समय, मात्र 14 दिनों में पूरा कर लिया गया, जो न्याय की तत्परता को दर्शाता है।
यह भयावह घटना शादियाबाद थाना क्षेत्र के एक सुदूर गांव में हुई। 20 जुलाई, 2025 को बच्ची की मां द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत ने इस अमानवीय कृत्य का खुलासा किया। मां ने आरोप लगाया कि 18 जुलाई को, जब वह धान की रोपाई के लिए घर से बाहर गई हुई थी, तब उसके पति ने उसकी मासूम बेटी के साथ दरिंदगी की।
वकील सिंह ने पुलिस की चुस्त-दुरुस्त कार्रवाई की सराहना की, जिसके चलते 12 सितंबर को आरोप पत्र दाखिल कर दिया गया। इसके बाद, 15 सितंबर से अदालत में दैनिक कार्यवाही शुरू हुई। त्वरित सुनवाई के दौरान, अभियोजन पक्ष ने पांच गवाह पेश किए, जिन्होंने घटना के भयावहता को साबित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सभी साक्ष्यों की गहन समीक्षा और अभियोजन पक्ष व बचाव पक्ष की दलीलों को सुनने के उपरांत, न्यायाधीश ने 26 सितंबर को अपना फैसला सुनाया। आरोप पत्र दाखिल होने के महज दो हफ्तों के भीतर, दोषी सौतेले पिता को न केवल आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई, बल्कि उस पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। यह फैसला बालिकाओं की सुरक्षा और न्याय की त्वरित प्राप्ति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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