मतदाता सूची पर सुप्रीम कोर्ट की पैनी नजर: तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और बिहार में एसआईआर पर निर्वाचन आयोग से मांगा जवाब
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभ्यास की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा है। द्रमुक, माकपा, पश्चिम बंगाल कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस नेताओं द्वारा दायर इन याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने दो सप्ताह के भीतर आयोग से विस्तृत जानकारी देने का निर्देश दिया है।
यह मामला बिहार में भी गरमाया हुआ है, जहां एसआईआर कवायद को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट पहले से ही सुनवाई कर रहा है। बिहार में, निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को ‘सटीक’ बताया है और राजनीतिक दलों व गैर सरकारी संगठनों पर इस प्रक्रिया को बदनाम करने के लिए झूठे आरोप लगाने का आरोप लगाया है। आयोग ने दावा किया है कि अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद से किसी भी मतदाता ने नाम हटाने के खिलाफ कोई अपील दायर नहीं की है। आयोग ने इस आरोप का भी खंडन किया है कि एसआईआर प्रक्रिया के बाद तैयार की गई बिहार की अंतिम मतदाता सूची में “मुसलमानों को अनुपातहीन तरीके से बाहर” किया गया है।
निर्वाचन आयोग ने 30 सितंबर को बिहार की अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की थी, जिसमें मतदाताओं की कुल संख्या लगभग 47 लाख घटकर 7.42 करोड़ रह गई, जो पुनरीक्षण से पहले 7.89 करोड़ थी। हालांकि, यह संख्या एक अगस्त को जारी मसौदा सूची में दर्ज 7.24 करोड़ मतदाताओं से 17.87 लाख अधिक है। मृत्यु, प्रवास और दोहराव जैसे विभिन्न कारणों से 65 लाख मतदाताओं के नाम मूल सूची से हटा दिए गए थे, जबकि 21.53 लाख नए मतदाता जोड़े गए और 3.66 लाख हटाए गए, जिससे कुल संख्या में 17.87 लाख की वृद्धि हुई।
बिहार में 243 सदस्यीय विधानसभा की 121 सीटों पर पहले चरण का चुनाव बृहस्पतिवार को संपन्न हो गया है, जबकि शेष 122 निर्वाचन क्षेत्रों में 11 नवंबर को मतदान होगा। मतों की गिनती 14 नवंबर को की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला इन राज्यों में चुनावी प्रक्रियाओं की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है।
Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates
Subscribe to get the latest posts sent to your email.


