तेजस्वी के लिए नई चुनौती: झारखंड मुक्ति मोर्चा ने बिहार में अकेले उतरने का किया ऐलान

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बिहार चुनावी रण में जेएमएम की स्वतंत्र पैंतरेबाज़ी: महागठबंधन के लिए नई चुनौती

बिहार विधानसभा चुनावों की सरगर्मियों के बीच, झारखंड की सत्ताधारी पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) ने एक बड़ा दांव चलते हुए अकेले चुनावी मैदान में उतरने की घोषणा की है। हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाले इस कदम से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ-साथ राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के लिए भी नई चुनौतियाँ खड़ी हो गई हैं। जेएमएम बिहार की छह महत्वपूर्ण सीटों – चकाई, धमदाहा, कटोरिया, पीरपैंती, मनिहारी और जमुई – पर अपने प्रत्याशी उतारेगी। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब विपक्षी गठबंधन में सीटों के बंटवारे को लेकर चर्चाएं परवान चढ़ रही थीं, और जेएमएम के महागठबंधन का हिस्सा बनने की उम्मीदें थीं।

राजद को झटके की आहट?

इस घोषणा से राजद को सीधे तौर पर झटका लग सकता है, क्योंकि जेएमएम को महागठबंधन के प्रमुख स्तंभों में गिना जा रहा था। पहले झारखंड के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने स्पष्ट किया था कि जेएमएम ने बिहार की कुछ विशेष सीटों पर चुनाव लड़ने की अपनी मंशा राजद नेता तेजस्वी यादव को अवगत करा दी है। पटना में हाल ही में हुई एक बैठक में इस मुद्दे पर गहन विचार-विमर्श हुआ था, जहाँ जेएमएम ने भाजपा गठबंधन में अपनी भागीदारी के संभावित लाभों को रेखांकित किया था, विशेषकर आदिवासी और सीमावर्ती क्षेत्रों में मतदाताओं के एकीकरण के संदर्भ में।

सहमति का अभाव और स्वतंत्र राह

मंत्री सोनू ने खुलासा किया कि 6 अक्टूबर को संपन्न हुई गठबंधन बैठक में यह तय किया गया था कि हेमंत सोरेन और तेजस्वी यादव जेएमएम की भूमिका को अंतिम स्वरूप देने के लिए आगे और बातचीत करेंगे। हालांकि, सहमति के अभाव के चलते, जेएमएम ने अब स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने का फैसला किया है। पार्टी की रणनीति झारखंड की सीमा से लगे इलाकों, खासकर आदिवासी बहुल निर्वाचन क्षेत्रों में अपने प्रभाव को और मजबूत करने पर केंद्रित है। मंत्री सोनू ने 11 नवंबर को घाटशिला (झारखंड) में होने वाले आगामी उपचुनाव के महत्व पर भी जोर दिया, जिसे जेएमएम का पारंपरिक गढ़ बताया गया है।

गठबंधन की गतिशीलता पर प्रभाव?

बिहार में दो चरणों में – 6 और 11 नवंबर को – मतदान संपन्न होगा, और मतगणना 14 नवंबर को होगी। महागठबंधन जहां अपने उम्मीदवारों के नामों को अंतिम रूप देने में जुटा है, वहीं यह देखना दिलचस्प होगा कि जेएमएम का स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ना आने वाले दिनों में गठबंधन की गतिशीलता और सीटों के गणित को किस हद तक प्रभावित करता है।


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