जैसलमेर में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का शौर्य और आस्था का संगम: तनोट माता मंदिर से थार शक्ति अभ्यास तक
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपनी जैसलमेर यात्रा के दौरान आस्था और शौर्य के अनूठे संगम का अनुभव किया। शुक्रवार को, उन्होंने लोंगेवाला के पास स्थित प्रसिद्ध तनोट माता मंदिर में शीश झुकाया और पूजनीय मंदिर में श्रद्धांजलि अर्पित की। मंदिर में, उन्होंने 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के उन असाधारण क्षणों को याद किया जब पाकिस्तानी सेना द्वारा गिराए गए बम तनोट माता मंदिर परिसर पर गिरे, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से फटे नहीं। यह घटना मंदिर की चमत्कारी शक्ति का प्रमाण मानी जाती है।
मंदिर में दर्शनोपरांत, श्री सिंह ने लोंगेवाला सीमा पर चल रहे ‘थार शक्ति’ नामक भारतीय सेना के वृहद युद्धाभ्यास का अवलोकन किया। यह अभ्यास विशेष रूप से रेगिस्तानी इलाकों में भूमि-आधारित युद्ध की चुनौतियों और रणनीतियों पर केंद्रित है, जो भारतीय सेना की मारक क्षमता और तैयारियों का प्रदर्शन करता है।
शौर्य वन का उद्घाटन और 1971 के युद्ध की स्मृतियाँ
रक्षा मंत्री की यात्रा गुरुवार को जैसलमेर में ‘शौर्य वन’ के उद्घाटन से शुरू हुई। यह थार रेगिस्तान में एक अनूठा प्रकाश और ध्वनि शो है, जो 1971 के भारत-पाक युद्ध के वीरों की गाथाओं को जीवंत करता है। इसके पश्चात, उन्होंने 1971 के भारत-पाक युद्ध संग्रहालय का भी दौरा किया, जहाँ उन्होंने युद्ध के इतिहास और नायकों को नमन किया।
पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का सबक
‘बड़ाखाना’ के दौरान सैनिकों को संबोधित करते हुए, रक्षा मंत्री ने पाकिस्तान को एक कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि “पाकिस्तान अब भारत के खिलाफ कोई भी दुस्साहस करने से पहले दो बार सोचेगा क्योंकि हमारे सशस्त्र बलों ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान उन्हें कड़ी चेतावनी दी है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ समाप्त नहीं हुआ है, बल्कि विराम पर है, और यदि पाकिस्तान ने कोई भी नापाक हरकत की, तो उसे और भी भीषण प्रत्युत्तर मिलेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि हमारे पायलटों ने पाकिस्तान के सामने भारत की ताकत का केवल एक नमूना पेश किया है; यदि अवसर मिला, तो वे भारत की पूर्ण शक्ति का प्रदर्शन करेंगे।
राष्ट्र निर्माण में सैनिकों की भूमिका और आत्मनिर्भर भारत का संकल्प
श्री सिंह ने देश के विरोधियों की निरंतर सक्रियता को स्वीकार करते हुए, सशस्त्र बलों को सतर्क रहने और किसी भी गतिविधि का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने का आह्वान किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के 2047 तक भारत को एक विकसित और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने के दृष्टिकोण में सशस्त्र बलों के महत्वपूर्ण योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “हमारे सैनिक न केवल सीमाओं के रक्षक हैं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के अग्रदूत भी हैं। यह सदी हमारी है; भविष्य हमारा है, और आत्मनिर्भरता की दिशा में हमने जो प्रगति की है, मुझे विश्वास है कि हमारी सेना निस्संदेह दुनिया में सर्वश्रेष्ठ बनेगी।”
‘शौर्यवन’: लचीलेपन और पारिस्थितिक संरक्षण का प्रतीक
‘बड़ाखाना’ से पूर्व, रक्षा मंत्री ने जैसलमेर में अपनी तरह के अनूठे कैक्टस-कम-बॉटनिकल गार्डन ‘शौर्यवन’ का उद्घाटन किया। भारतीय सेना की एक उत्कृष्ट पहल, ‘शौर्यवन’ थार रेगिस्तान के विस्तार को एक जीवंत नखलिस्तान में बदल देता है, जो लचीलेपन, पारिस्थितिक संरक्षण और नवाचार का प्रतीक है। यह पहल रेगिस्तानी पर्यावरण के संरक्षण के साथ-साथ सैनिकों के लिए एक प्रेरणादायक और शांत वातावरण प्रदान करती है।
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