वाराणसी और आगरा में BJP हारी गोरखपुर में फंसा मुकाबला 2027 से पहले क्या बदलेगा सियासी गणित

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PEEYUSH UPADHYAY
पीयुष उपाध्याय एक अनुभवी समाचार संपादक हैं, जो Aware Media Network के लिए देश-दुनिया की प्रमुख खबरों, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग सुनिश्चित करते हैं। उनका अनुभव...
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यूपी एमएलसी चुनाव के नतीजों ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। वाराणसी और आगरा की शिक्षक सीटों पर बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा है जबकि गोरखपुर में मुकाबला बेहद कड़ा नजर आया। इन नतीजों के बीच समाजवादी पार्टी को पिछली बार के मुकाबले फायदा मिलता दिख रहा है। खास बात यह है कि इन चुनावों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लेकर बीजेपी के कई बड़े नेता मैदान में सक्रिय रहे थे।

विधान परिषद की 11 सीटों पर हुए चुनाव में बीजेपी पांच सीटें जीत चुकी थी और एक सीट पर आगे चल रही थी। वहीं समाजवादी पार्टी दो सीटें जीत चुकी थी और तीन सीटों पर बढ़त बनाए हुए थी। अगर ये रुझान अंतिम नतीजों में बदलते हैं तो बीजेपी की सीटों की संख्या पिछली बार के बराबर रह सकती है जबकि सपा की सीटें बढ़ सकती हैं।

वाराणसी और आगरा की शिक्षक सीटों पर बीजेपी को मिली हार ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा है। पार्टी ने इन दोनों सीटों पर जीत हासिल करने के लिए पूरी ताकत लगाई थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभाएं की थीं और मंत्रियों से लेकर संगठन के नेताओं तक को प्रचार में लगाया गया था। इसके बावजूद बीजेपी यहां जीत हासिल नहीं कर पाई। दोनों सीटों पर समाजवादी पार्टी की जीत से पार्टी को मनोबल बढ़ाने का मौका मिला है।

गोरखपुर शिक्षक सीट पर भी मुकाबला काफी दिलचस्प रहा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जिले में बीजेपी के ध्रुव त्रिपाठी और सपा के संजय त्रिपाठी के बीच मुकाबले के साथ निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी समीकरण प्रभावित किया। शुरुआती रुझानों में बीजेपी को मामूली बढ़त मिलने की खबर थी। ऐसे में इस सीट के नतीजे पर सबकी नजर बनी रही।

लखनऊ और झांसी की स्नातक सीटों पर भी बीजेपी को चुनौती मिली। इन सीटों पर सपा की बढ़त ने पार्टी की चिंता बढ़ाई। वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश और रुहेलखंड की कुछ सीटों पर बीजेपी का प्रदर्शन बेहतर रहा।

इन चुनावों को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल का संकेत माना जा रहा है। हालांकि विधान परिषद के शिक्षक और स्नातक चुनावों के नतीजों से विधानसभा चुनाव का सीधा अनुमान नहीं लगाया जा सकता। फिर भी बीजेपी के लिए यह अपने संगठन और मतदाताओं के बीच पकड़ की समीक्षा करने का मौका है जबकि सपा इन नतीजों को अपनी बढ़ती ताकत के रूप में देख सकती है।


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पीयुष उपाध्याय एक अनुभवी समाचार संपादक हैं, जो Aware Media Network के लिए देश-दुनिया की प्रमुख खबरों, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग सुनिश्चित करते हैं। उनका अनुभव पत्रकारिता में 7+ वर्षों का है और वे निष्पक्ष, भरोसेमंद और समय पर समाचार प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कई पुरस्कार और मान्यता प्राप्त की है, जिनमें 2022 में “Best Investigative Journalist” और 2021 में “Top 10 Editors in Uttarakhand” शामिल हैं।
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