आरएसएस और उसकी विचारधारा का वंदे मातरम से कभी कोई संबंध नहीं रहा:गहलोत

By
Aware Media Network
Aware Media Network एक स्वतंत्र डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म है, जो देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरें, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग पाठकों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी...
- News Desk
3 Min Read
आरएसएस और उसकी विचारधारा का वंदे मातरम से कभी कोई संबंध नहीं रहा:गहलोत

जयपुर. केंद्रीय मंत्री अमित शाह के चित्तौड़गढ़ में वंदे मातरम पर दिए गए भाषण को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बीजेपी-आरएसएस पर निशाना साधा है. इस संबंध में आज एक्स के जरिए गहलोत ने बड़ी बात कही है. उन्होंने कहा कि कल चित्तौड़गढ़ में अमित शाह ने वंदे मातरम पर ज्ञान बांटा.

यह सुनकर इतिहास के जानकार हंस पड़े. वंदे मातरम् से बीजेपी-आरएसएस का क्या रिश्ता? यह वही आरएसएस और उसकी विचारधारा है जिसका वंदे मातरम से कभी कोई संबंध नहीं रहा. आज वे इतिहास पर व्याख्यान दे रहे हैं, यह उनका अपराध बोध है, और कुछ नहीं। इसीलिए वे अब वंदे मातरम को लेकर संसद में कानून बना रहे हैं.

गहलोत ने कहा कि वंदे मातरम् पहली बार 1896 में कलकत्ता कांग्रेस अधिवेशन में गूंजा था। 1905 के बाद से हर कांग्रेस अधिवेशन में यह परंपरा बन गई। कांग्रेस नेता वंदे मातरम् का नारा लगाकर अंग्रेजों से सीधा मुकाबला करते थे। जब अंग्रेजों ने प्रतिबंध लगाए, जुर्माना लगाया, जेल भेजा, लाठियां बरसाईं, तब भी कांग्रेसी बड़े उत्साह से वंदे मातरम् गाते रहे। 1937 में गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की सलाह पर इसका समावेशी स्वरूप अपनाया गया जिससे यह हर भारतीय का आम गीत बन गया, लेकिन आरएसएस का वंदे मातरम् से कभी कोई लेना-देना नहीं रहा।

गहलोत ने कहा कि 1925 में आरएसएस के गठन से लेकर 1947 में आजादी तक उन्होंने कभी भी वंदे मातरम को अपना गीत नहीं बनाया. जिस गीत के लिए हजारों देशभक्त अंग्रेजों के डर से फाँसी पर चढ़े, जेल गए, लाठियाँ खाईं, उस गीत को गाने की हिम्मत आरएसएस कभी नहीं जुटा सका। इसके बजाय, 1939 में, जब पूरा देश वंदे मातरम गाकर अंग्रेजों से लड़ रहा था, आरएसएस ने अपने लिए एक अलग प्रार्थना बनाई, नमस्ते सदा वत्सले, ताकि ब्रिटिश सरकार आरएसएस से नाराज न हो। जब 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में देश का हर बच्चा, बूढ़ा और जवान अंग्रेजों के खिलाफ सड़कों पर उतर आया, तब आरएसएस उस आंदोलन से दूर रहा और अंग्रेजों को खुश करने में लगा रहा.

भाषणों से इतिहास नहीं बदलता

गहलोत ने कहा कि यही कारण है कि आजादी के बाद देश की जनता ने उन्हें दशकों तक सत्ता से दूर रखा. अब सत्ता में आने के बाद वे अपने इतिहास के पन्ने बदलना चाहते हैं, ताकि अपने दाग धो सकें. लेकिन याद रखें, भाषणों से इतिहास नहीं बदलता। देश की जनता सब जानती है, उनके पाप ऐसे नहीं धुलने वाले।

PC:hindi.oneindia
अपडेटेड खबरों के लिए हमारे व्हाट्सएप चैनल को फॉलो करें


Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Share This Article
Follow:
Aware Media Network एक स्वतंत्र डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म है, जो देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरें, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग पाठकों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी संपादकीय टीम विश्वसनीय स्रोतों, आधिकारिक आंकड़ों और पत्रकारिता के नैतिक सिद्धांतों के आधार पर समाचार तैयार करती है। Aware Media Network का उद्देश्य निष्पक्ष, सटीक और समय पर जानकारी प्रदान करना है, ताकि पाठक जागरूक निर्णय ले सकें और समसामयिक घटनाओं को बेहतर ढंग से समझ सकें।
कोई टिप्पणी नहीं

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Exit mobile version