नाना पाटेकर के निधन के बाद उनके चाहने वाले और फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोग उनसे जुड़ी यादें साझा कर रहे हैं। इसी कड़ी में अभिनेता शिवाजी साटम ने नाना पाटेकर की प्रार्थना सभा में उनकी दरियादिली के कई किस्से सुनाए। उन्होंने बताया कि मुश्किल वक्त में नाना उनके लिए एक मजबूत सहारे की तरह खड़े रहे।
नाना के कारण मिली हिंदी फिल्म में पहचान
शिवाजी साटम ने बताया कि हिंदी सिनेमा में उनके शुरुआती सफर में नाना पाटेकर की अहम भूमिका रही। उनकी पहली हिंदी फिल्म ‘यशवंत’ थी, जिसमें उन्होंने पुलिस अधिकारी का किरदार निभाया था। शिवाजी के मुताबिक, शुरुआत में वह यह भूमिका करने के लिए तैयार नहीं थे, लेकिन नाना ने उन्हें समझाया और आखिरकार उन्होंने फिल्म में काम किया।
कम फीस मिलने पर नाराज हो गए थे नाना
फिल्म पूरी होने के बाद नाना ने शिवाजी साटम से उनकी फीस के बारे में पूछा। जब उन्हें पता चला कि शिवाजी को अपेक्षाकृत कम भुगतान किया गया है, तो वह नाराज हो गए। शिवाजी ने नाना को निर्माता से बात करने से रोकने की कोशिश की, लेकिन नाना नहीं माने।
उन्होंने निर्माता को बुलाकर कहा कि शिवाजी को उनकी मेहनत के मुताबिक पैसे नहीं दिए गए हैं। शिवाजी साटम के मुताबिक, नाना हमेशा अपने दोस्तों और सहयोगियों के हक के लिए आवाज उठाते थे।
पत्नी को कैंसर हुआ तो नाना ने दिया पूरा साथ
शिवाजी साटम ने सबसे भावुक किस्सा उस समय का सुनाया, जब उनकी पत्नी कैंसर से जूझ रही थीं। उस वक्त वह ‘गुलाम-ए-मुस्तफा’ की शूटिंग कर रहे थे। पत्नी की बीमारी के कारण शिवाजी ने फिल्म में काम जारी रखने में असमर्थता जताई थी।
लेकिन नाना ने उन्हें हिम्मत दी और फिल्म के निर्देशक से बात की। इसके बाद शूटिंग का ऐसा शेड्यूल बनाया गया कि शिवाजी दोपहर 12 बजे सेट पर आते और शाम 8 बजे तक घर लौट सकते थे।
शिवाजी ने कहा कि अगर नाना पाटेकर उनके साथ खड़े नहीं होते तो उस मुश्किल दौर में उनके लिए काम और परिवार दोनों संभालना बेहद कठिन हो जाता।
नाना की यादों में भावुक हुए शिवाजी
नाना पाटेकर के निधन के बाद शिवाजी साटम की ये बातें उनके व्यक्तित्व का एक अलग पहलू सामने लाती हैं। पर्दे पर अपनी दमदार अदाकारी के लिए मशहूर नाना ने निजी जिंदगी में भी अपने दोस्तों और सहयोगियों का साथ निभाया। उनके लिए रिश्ते और इंसानियत अक्सर सबसे ऊपर रहे।
नाना के जाने के बाद इंडस्ट्री में उनकी फिल्मों के साथ-साथ उनकी मदद और दरियादिली के किस्से भी लगातार सामने आ रहे हैं। शिवाजी साटम की बातें इसी बात की याद दिलाती हैं कि किसी कलाकार की असली विरासत सिर्फ उसकी फिल्में नहीं, बल्कि उसके पीछे छोड़े रिश्ते और यादें भी होती हैं।
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