अनियंत्रित सुख: पी.जी.ए.डी. का रहस्य

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- News Desk
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जब शरीर ही न दे आराम: अनचाहे ऑर्गेज्म के झटके – सहज चरमोत्कर्ष विकार (PGAD)

कल्पना कीजिए, आप किसी महत्वपूर्ण मीटिंग में प्रेजेंटेशन दे रहे हैं या दोस्तों के साथ हंसी-मजाक में डूबे हुए हैं, और अचानक आपको तेज सिरदर्द या मांसपेशियों में ऐंठन जैसा कुछ महसूस होने लगता है। कितना असहज होगा, है ना? पर कुछ लोगों के लिए यह एक रोज़मर्रा की हकीकत है, बस फर्क इतना है कि उन्हें सिर में दर्द नहीं, बल्कि किसी भी रोमांटिक या यौन उत्तेजना के बिना, बेतरतीब ढंग से ऑर्गेज्म के झटके महसूस होते हैं।

यह एक दुर्लभ विकार है जिसे चिकित्सा जगत में सहज चरमोत्कर्ष विकार (Persistent Genital Arousal Disorder – PGAD) या सहज कामोन्माद विकार के नाम से जाना जाता है। यह एक ऐसी स्थिति है जो शरीर और मस्तिष्क दोनों को समान रूप से प्रभावित करती है।

यह विकार क्या है?

PGAD से पीड़ित व्यक्ति किसी भी समय, किसी भी स्थान पर – घर पर, मेट्रो में, या किसी मीटिंग के बीच में – बिना किसी यौन उत्तेजना के बार-बार ऑर्गेज्म जैसी तीव्र अनुभूति का अनुभव कर सकता है। चिकित्सक बताते हैं कि इन झटकों के लिए किसी विशेष कारण या ट्रिगर की आवश्यकता नहीं होती।

इस विकार का कारण क्या है?

इस जटिल विकार के पीछे कोई एक निश्चित कारण नहीं है। यह विभिन्न समस्याओं का परिणाम हो सकता है, जिनमें तंत्रिका संबंधी गड़बड़ियां और मानसिक तनाव प्रमुख हैं।

  • तंत्रिका संबंधी समस्याएं: रीढ़ की हड्डी (spine) या पेल्विक क्षेत्र की नसों में खराबी, या तंत्रिका क्षति (nerve damage) इसके लिए जिम्मेदार हो सकती है।
  • मानसिक तनाव: अत्यधिक तनाव, पुराना आघात (trauma), या दबा हुआ भावनात्मक दर्द भी इस स्थिति को बढ़ा सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बना रहने वाला तनाव तंत्रिका तंत्र को अति-संवेदनशील बना देता है, जिससे ऐसे अनचाहे एपिसोड्स की आवृत्ति बढ़ जाती है।

इसका प्रबंधन कैसे करें?

फिलहाल PGAD का कोई स्थायी इलाज मौजूद नहीं है, लेकिन उचित उपचार से लक्षणों में काफी राहत पाई जा सकती है। इसके लिए तंत्रिका तंत्र की अति-सक्रियता को कम करने वाली दवाएं, पेल्विक फ्लोर फिजियोथेरेपी, परामर्श और माइंडफुलनेस जैसी विश्राम तकनीकों का सहारा लिया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, कॉग्निटिव बिहेवियर थेरेपी (CBT) नकारात्मक विचारों और भय पर काबू पाने में प्रभावी साबित होती है। अधिकांश मामलों में, चिकित्सक और मनोवैज्ञानिक के संयुक्त उपचार से सर्वोत्तम परिणाम प्राप्त होते हैं।

जीवन पर इसका प्रभाव क्या पड़ता है?

इन अचानक होने वाले एपिसोड्स का व्यक्ति के आत्मविश्वास पर गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। लोग लगातार इस चिंता में रहते हैं कि यह कब और कहाँ हो जाएगा, जिससे उनके सामाजिक जीवन और रिश्तों पर प्रतिकूल असर पड़ता है। ऐसी स्थिति में, कपल्स थेरेपी (couples therapy) रिश्तों में विश्वास और संवाद को फिर से मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।


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