वृंदावन की गलियों में जब ‘राधे-राधे’ की गूँज सुनाई देती है, तो मन भक्ति के सागर में गोते लगाने लगता है। अक्सर श्रद्धालु अपनी यात्रा बांके बिहारी के दर्शन और प्रेम मंदिर की चकाचौंध तक ही सीमित रखते हैं, लेकिन कान्हा की इस नगरी का असली रस इसकी उन गलियों में छिपा है, जहाँ रूह को सुकून मिलता है। अगर आप इस बार वृंदावन की वास्तविक रूह, अलौकिक रास और आध्यात्मिक रंगों को करीब से महसूस करना चाहते हैं, तो बांके बिहारी मंदिर से आगे बढ़कर इन अद्भुत स्थलों की यात्रा जरूर करें।
वृंदावन के वे मंदिर, जिनकी महिमा है निराली:
1. इस्कॉन मंदिर (श्रीकृष्ण-बलराम मंदिर)
वृंदावन के हृदय में स्थित इस्कॉन मंदिर अपनी भव्यता और दिव्यता के लिए विश्वविख्यात है। सफेद संगमरमर की नक्काशी वाला यह मंदिर ‘श्रीकृष्ण-बलराम मंदिर’ के नाम से भी जाना जाता है। साल 1975 में स्थापित यह भारत का पहला इस्कॉन मंदिर है। यहाँ की कीर्तन और आध्यात्मिक ऊर्जा आपको एक अलग ही दुनिया में ले जाएगी।
2. श्री राधा रमन मंदिर
वृंदावन के ‘सप्त देवालयों’ या सात प्रमुख मंदिरों में से एक राधा रमन मंदिर का अपना एक विशेष महत्व है। यहाँ भगवान श्रीकृष्ण ‘राधा-रमण’ के रूप में विराजमान हैं। जन्माष्टमी के पावन अवसर पर यहाँ की रौनक और भक्तों का सैलाब देखने लायक होता है। यह मंदिर भक्ति और परंपरा का अद्भुत संगम है।
3. रहस्यमयी निधिवन
निधिवन वृंदावन का वह कोना है, जहाँ आज भी चमत्कार और आस्था का मेल दिखता है। मान्यता है कि यहाँ के टेढ़े-मेढ़े तुलसी के जोड़े पेड़ रात में गोपियाँ बन जाते हैं और स्वयं कान्हा उनके साथ रास रचाते हैं। इसी अलौकिक रहस्य के कारण शाम के बाद यहाँ प्रवेश वर्जित है। यहाँ की शांति में आपको राधा-कृष्ण के प्रेम की अनुभूति होगी।
4. पावन केशी घाट
यमुना के किनारे स्थित केशी घाट केवल एक सुंदर तट नहीं, बल्कि गहरी आस्था का केंद्र है। शाम ढलते ही जब यहाँ माँ यमुना की भव्य आरती होती है और दीयों की रोशनी पानी में थिरकती है, तो दृश्य मंत्रमुग्ध कर देने वाला होता है। यहाँ नाव की सवारी करते हुए सूर्यास्त देखना आपकी यात्रा का सबसे सुकून भरा पल हो सकता है।
5. रंगजी मंदिर (दक्षिण भारतीय भव्यता)
वृंदावन के बीचों-बीच दक्षिण भारतीय स्थापत्य कला का दर्शन करना हो, तो रंगजी मंदिर जरूर जाएं। भगवान विष्णु के अवतार ‘रंगनाथ’ को समर्पित यह मंदिर मद्रास (चेन्नई) के प्रसिद्ध रंगनाथ मंदिर की शैली में बना है। इसकी अनूठी वास्तुकला और विशाल परिसर उत्तर और दक्षिण भारत की संस्कृति का एक सुंदर मेल पेश करता है।
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