बेतिया का रण: कांग्रेस की वापसी की उम्मीदें, दिग्गजों के बीच कड़ा मुकाबला

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Bettiah Assembly Seat: बेतिया सीट पर वापसी को बेकरार है कांग्रेस, इन उम्मीदवारों के बीच कड़ी टक्कर

बेतिया का रण: 11 नवंबर को तय होगा जनता का फैसला, 14 नवंबर को खुलेगा पिटारा!

बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले की बेतिया विधानसभा सीट इस बार राजनीति का केंद्र बनी हुई है। 11 नवंबर को होने वाले दूसरे चरण के मतदान के साथ ही 14 नवंबर को वोटों की गिनती का इंतजार है, जो इस सीट के भविष्य को तय करेगा। इस बार का मुकाबला त्रिकोणीय होने की प्रबल संभावना है, जहां भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस और जनसुराज पार्टी के उम्मीदवार अपनी-अपनी जीत का दावा ठोक रहे हैं।

मुख्य मुकाबला: बीजेपी बनाम कांग्रेस, जनसुराज की पैनी चाल

फिलहाल, इस सामान्य श्रेणी की सीट पर भारतीय जनता पार्टी का दबदबा कायम है। यह सीट पश्चिम चंपारण लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच माना जा रहा है, लेकिन प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी ने भी अपना उम्मीदवार उतारकर मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है।

उम्मीदवारों की जंग: दिग्गजों का आमना-सामना

भारतीय जनता पार्टी ने इस सीट से अपनी वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री रेणु देवी को मैदान में उतारा है। कांग्रेस ने वासी अहमद पर भरोसा जताया है, जबकि जनसुराज पार्टी की ओर से अनिल कुमार चुनावी मैदान में हैं।

पिछले चुनाव का इतिहास: बदलता रहा है समीकरण

2015 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर कांग्रेस ने परचम लहराया था। हालांकि, इसके बाद भारतीय जनता पार्टी ने मजबूत वापसी करते हुए “बेतिया का किला” फतह कर लिया। इस बार कांग्रेस जहां अपनी पुरानी प्रतिष्ठा वापस पाने के लिए बेताब है, वहीं भाजपा के सामने अपनी सत्ता बचाने की बड़ी चुनौती है। जनसुराज की एंट्री ने इस मुकाबले में एक नया रंग भर दिया है, जिससे हर किसी की निगाहें इस सीट पर टिकी हुई हैं।

रेणु देवी: एक मजबूत दावेदार

भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री रेणु देवी का इस सीट पर गहरा प्रभाव रहा है। वह अब तक चार बार यहां से जीत हासिल कर चुकी हैं और बिहार की उपमुख्यमंत्री भी रह चुकी हैं। बेतिया में उन्हें महिला उम्मीदवारों और संगठित बीजेपी कैडर की एक मजबूत नेता के तौर पर देखा जाता है।

बेतिया का भविष्य: किसकी होगी जीत, किसका होगा राज?

हालांकि, यह सीट कांग्रेस के लिए भी नई नहीं है, क्योंकि उन्होंने भी यहां कई बार जीत का स्वाद चखा है। लेकिन हाल के वर्षों में भाजपा का बढ़ता प्रभाव इस बार के चुनाव को और रोमांचक बना रहा है। अब देखना यह है कि 11 नवंबर को जनता किसे अपना आशीर्वाद देती है और 14 नवंबर को कौन सा दल बेतिया में अपनी जीत का परचम लहराता है।


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