UPI चार्ज पर राहुल गांधी का हमला, पीएम मोदी से बोले- वापस लीजिए

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PEEYUSH UPADHYAY
पीयुष उपाध्याय एक अनुभवी समाचार संपादक हैं, जो Aware Media Network के लिए देश-दुनिया की प्रमुख खबरों, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग सुनिश्चित करते हैं। उनका अनुभव...
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UPI के बड़े मर्चेंट ट्रांजेक्शन पर प्रस्तावित 0.4% MDR को लेकरर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने वीडियो जारी कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इसे वापस लेने की अपील की है। वहीं सरकार ने साफ किया है कि यह टैक्स नहीं बल्कि MDR है।

राहुल गांधी ने पीएम मोदी से की वापसी की मांग

UPI के नए चार्जिंग सिस्टम को लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इसे वापस लेने की मांग की है। बुधवार को सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो में राहुल गांधी ने सरकार के फैसले पर सवाल उठाए।

उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के एक पुराने फैसले का उदाहरण देते हुए प्रधानमंत्री मोदी पर अमेरिका के दबाव के सामने झुकने का आरोप लगाया। राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री को इस फैसले को वापस लेना चाहिए।

15 अक्टूबर से लागू होगा नया MDR

दरअसल, NPCI की नई व्यवस्था के तहत 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से अधिक के कुछ P2M यानी Person-to-Merchant UPI लेनदेन पर 0.4% MDR लागू होगा।

इसका भुगतान व्यापारी या संबंधित मर्चेंट करेगा। सामान्य व्यवस्था में प्रति लेनदेन MDR की अधिकतम सीमा ₹300 रखी गई है। ₹75,000 या उससे अधिक के लेनदेन पर भी अधिकतम ₹300 ही MDR होगा।

महत्वपूर्ण बात यह है कि P2P यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किए जाने वाले UPI भुगतान पर कोई MDR नहीं लगेगा। ₹2,000 तक के पात्र मर्चेंट लेनदेन भी मौजूदा व्यवस्था के तहत शुल्क-मुक्त रहेंगे।

सरकार ने कहा- इसे टैक्स कहना सही नहीं

वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि MDR सरकार या NPCI द्वारा वसूला जाने वाला टैक्स नहीं है। यह भुगतान प्रणाली से जुड़े बैंकों और पेमेंट ऐप प्रदाताओं समेत अन्य भागीदारों के बीच वितरित किया जाएगा।

सरकार के मुताबिक, इस व्यवस्था का उद्देश्य UPI इकोसिस्टम के संचालन, सुरक्षा और आगे के विस्तार की लागत को समर्थन देना है। मंत्रालय ने यह भी कहा है कि लगभग 96% मर्चेंट UPI लेनदेन प्रभावित नहीं होंगे।

छोटे कारोबारियों को राहत

नई व्यवस्था में छोटे कारोबारियों के लिए भी अलग प्रावधान रखा गया है। सरकार के अनुसार, QR कोड के जरिए हर महीने ₹1 लाख तक UPI भुगतान प्राप्त करने वाले पात्र छोटे मर्चेंट्स के लिए जीरो-MDR व्यवस्था जारी रहेगी।

इसके अलावा रेलवे, टेलीकॉम, बीमा, ईंधन और कुछ कृषि इनपुट जैसे क्षेत्रों में ₹2,000 से अधिक के लेनदेन पर 0.4% की जगह ₹5 का फ्लैट MDR निर्धारित किया गया है।

ग्राहक पर सीधे चार्ज नहीं लगाने का निर्देश

सरकार की ओर से कहा गया है कि MDR का खर्च सीधे ग्राहक पर नहीं डाला जाना चाहिए। वित्त मंत्रालय ने बैंकों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी है कि व्यापारी UPI भुगतान पर MDR की राशि ग्राहकों से अलग से वसूल न करें।

इसका मतलब है कि मौजूदा ढांचे में UPI इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति को ऐप पर अलग से 0.4% शुल्क नहीं देना होगा। हालांकि, कारोबारियों पर पड़ने वाले शुल्क का उनके मूल्य निर्धारण या व्यापारिक व्यवहार पर क्या असर होगा, यह अलग विषय है।

सरकार ने रोलबैक की संभावना से किया इनकार

राहुल गांधी की मांग के बाद सरकार की ओर से भी प्रतिक्रिया आई है। एक शीर्ष सरकारी अधिकारी ने कहा कि बड़े UPI मर्चेंट लेनदेन पर MDR लगाने का फैसला किया जा चुका है और इसे वापस लेने पर फिलहाल कोई पुनर्विचार नहीं है।

इस तरह UPI के नए MDR को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक मतभेद सामने आ गए हैं। राहुल गांधी इसे वापस लेने की मांग कर रहे हैं, जबकि सरकार इसे UPI सिस्टम की दीर्घकालिक स्थिरता से जोड़ रही है।

निष्कर्ष

₹2,000 से अधिक के चुनिंदा UPI मर्चेंट लेनदेन पर 15 अक्टूबर से लागू होने वाले 0.4% MDR ने राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी से इसे वापस लेने की मांग की है, जबकि सरकार का कहना है कि यह टैक्स नहीं बल्कि भुगतान प्रणाली के भागीदारों के बीच वितरित होने वाला MDR है। P2P भुगतान और बड़ी संख्या में छोटे मर्चेंट लेनदेन पहले की तरह शुल्क-मुक्त रहेंगे।


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पीयुष उपाध्याय एक अनुभवी समाचार संपादक हैं, जो Aware Media Network के लिए देश-दुनिया की प्रमुख खबरों, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग सुनिश्चित करते हैं। उनका अनुभव पत्रकारिता में 7+ वर्षों का है और वे निष्पक्ष, भरोसेमंद और समय पर समाचार प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कई पुरस्कार और मान्यता प्राप्त की है, जिनमें 2022 में “Best Investigative Journalist” और 2021 में “Top 10 Editors in Uttarakhand” शामिल हैं।
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