शारदीय नवरात्रि: अखंड ज्योति का आध्यात्मिक महत्व और चमत्कारी लाभ
नई दिल्ली: देशभर में शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। नौ दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में भक्त मां दुर्गा की आराधना करते हैं, और घर-घर में देवी स्वरूप की पूजा-अर्चना की जाती है। इन पवित्र परंपराओं में सबसे खास है ‘अखंड ज्योति’ जलाना। यह मान्यता है कि नवरात्रि के दौरान लगातार जलती रहने वाली यह पवित्र लौ मां दुर्गा की असीम कृपा दिलाती है।
माना जाता है कि अखंड ज्योति घर-परिवार को सुख, समृद्धि और शांति का आशीर्वाद भी प्रदान करती है। इस वर्ष शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 22 सितंबर से हुई है। नवरात्रि से ठीक पहले 21 सितंबर को सर्वपितृ अमावस्या और सूर्य ग्रहण का विशेष संयोग बना, जिसने अखंड ज्योति के महत्व को और भी बढ़ा दिया है।
नवरात्रि की अखंड ज्योति: गहरा अर्थ और अनमोल लाभ
अखंड ज्योत का अर्थ: ‘अखंड’ का अर्थ है जो कभी न रुके, और ‘ज्योति’ का अर्थ है प्रकाश। इस प्रकार, अखंड ज्योति एक ऐसी लौ है जो पूरे नौ दिनों तक निरंतर जलती रहती है। इसे मां दुर्गा की शक्ति और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है।
मां दुर्गा की विशेष कृपा: ऐसी मान्यता है कि नवरात्रि में अखंड ज्योति जलाने से घर पर मां दुर्गा की विशेष कृपा बनी रहती है। यह लौ परिवार को कठिनाइयों से बचाती है और सुख-समृद्धि के मार्ग प्रशस्त करती है।
नकारात्मक ऊर्जा का नाश: अखंड ज्योति को जलाने से घर का वातावरण शुद्ध और पवित्र होता है। ऐसा माना जाता है कि इसकी लौ नकारात्मक शक्तियों को दूर करती है और सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाती है।
सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य: नवरात्रि में जलने वाली यह ज्योति घर में खुशहाली लाती है। मां दुर्गा इस ज्योति से प्रसन्न होकर परिवार को अच्छे स्वास्थ्य, प्रगति और शांति का आशीर्वाद देती हैं।
पापों से मुक्ति और पुण्य की प्राप्ति: अखंड ज्योति जलाने से पुराने कर्मों के दोष मिटते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है। इसे धर्म और आध्यात्मिक लाभ का मार्ग माना गया है।
अखंड ज्योत की देखभाल जरूरी: नवरात्रि के नौ दिनों तक अखंड ज्योति को लगातार जलाए रखना आवश्यक है। इसके लिए समय-समय पर घी या तेल डालना चाहिए। यदि किसी कारणवश दीपक बुझ जाए, तो मां दुर्गा से क्षमा मांगकर उसे दोबारा प्रज्वलित किया जा सकता है।
अस्वीकरण: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और इंटरनेट पर उपलब्ध स्रोतों के आधार पर प्रस्तुत की गई है। किसी भी प्रकार का निर्णय लेने या कदम उठाने से पहले किसी योग्य ज्योतिषी या पुरोहित से परामर्श अवश्य करें।
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