बकरीद 2026: आस्था, त्याग और लजीज पकवानों का संगम; जानें भारत में ईद-उल-अजहा की रौनक और इसका महत्व
भारत की फिजाओं में जब केसरिया सेवइयों की मिठास और लजीज बिरयानी की सौंधी खुशबू घुलने लगे, तो समझ लीजिए कि ‘ईद-उल-अजहा’ यानी बकरीद का मुबारक मौका करीब है। यह त्योहार केवल पकवानों का उत्सव नहीं, बल्कि खुदा की राह में अटूट विश्वास और निस्वार्थ बलिदान की एक महान दास्तां है। साल 2026 में भारत एक बार फिर इस रूहानी पर्व को पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाने की तैयारी में है।
बलिदान की वह ऐतिहासिक कहानी
इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार, बकरीद का सीधा संबंध पैगंबर हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम से है। खुदा ने उनकी भक्ति की परीक्षा लेने के लिए उनसे अपनी सबसे प्रिय चीज कुर्बान करने को कहा था। इब्राहिम साहब ने बिना संकोच अपने बेटे हजरत इस्माइल की कुर्बानी देने का फैसला कर लिया। उनके इस जज्बे और समर्पण को देखकर अल्लाह ने उनके बेटे की जगह एक दुंबे (भेड़) को रख दिया। इसी याद में हर साल कुर्बानी का यह सिलसिला चलता आ रहा है, जो सिखाता है कि इंसानियत के लिए अपनी सबसे अजीज चीज त्यागना ही सबसे बड़ी इबादत है।
भारत में उत्सव का रंग: नमाज से दस्तरख्वान तक
भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में बकरीद की रौनक देखते ही बनती है। सुबह की पहली किरण के साथ ही लोग नए कपड़ों में सजे, इत्र महकाते हुए ईदगाहों और मस्जिदों की ओर रुख करते हैं। ‘अल्लाह-हु-अकबर’ की सदाओं के बीच सामूहिक नमाज अदा की जाती है और मुल्क की अमन-चैन के लिए दुआएं मांगी जाती हैं। नमाज के बाद गले मिलकर मुबारकबाद देने का सिलसिला शुरू होता है, जो दिलों की कड़वाहट को मिटा देता है।
कुर्बानी और तकसीम का नियम
बकरीद पर कुर्बानी का खास महत्व है। इस नियम की सबसे खूबसूरत बात इसका ‘बंटवारा’ (तकसीम) है। कुर्बानी के गोश्त को तीन बराबर हिस्सों में बांटा जाता है: एक हिस्सा परिवार के लिए, दूसरा रिश्तेदारों और दोस्तों के लिए, और तीसरा सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा—गरीबों और जरूरतमंदों के लिए। यह परंपरा समाज में समानता और सेवा का संदेश देती है।
पकवानों की महक: सेवइयां और बिरयानी
बिना जायके के कोई भी भारतीय त्योहार अधूरा है। बकरीद के मौके पर घरों में मटन बिरयानी, कबाब, कोरमा और कलेजी जैसे लजीज पकवान तैयार किए जाते हैं। मीठे में दूध और सूखे मेवों से बनी ‘किवामी सेवइयां’ और ‘शीर खुरमा’ मेहमानों का स्वागत करते हैं। यह वह समय होता है जब हर मजहब के दोस्त एक ही दस्तरख्वान पर बैठकर इस खुशी का हिस्सा बनते हैं।
बकरीद 2026: कब है तारीख?
इस्लामिक कैलेंडर के आखिरी महीने ‘धुल-हिज्जा’ की 10वीं तारीख को बकरीद मनाई जाती है। साल 2026 में यह त्योहार जून के अंत या जुलाई की शुरुआत में पड़ने की संभावना है। हालांकि, इसकी सटीक तारीख चांद के दीदार (Moon Sighting) पर निर्भर करेगी। भारत में चांद दिखने के अगले दिन पूरे जोश के साथ बकरीद मनाई जाएगी।
बकरीद हमें याद दिलाती है कि खुशी बांटने से बढ़ती है और सच्ची श्रद्धा वही है जो हमें त्याग और परोपकार के रास्ते पर ले जाए। इस 2026 में भी, वही पुरानी परंपराएं एक नए जोश और भाईचारे के साथ भारत के कोने-कोने में नजर आएंगी।
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