देव दिवाली का शुभ मुहूर्त: आज करें महास्नान, पूरी होंगी हर मनोकामना!

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कल मनाई जाएगी देव दिवाली, नोट करें शुभ मुहूर्त, होगी हर मनोकामना पूरी!

देव दिवाली: जब काशी में जगमगाते हैं स्वर्ग के दीप!

दीपावली के उल्लास और प्रकाश के बाद, अब समय है देव दिवाली का – एक ऐसा पावन पर्व जो सीधे देवताओं के आगमन का प्रतीक है। यह त्योहार, जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, देवताओं की अपनी दिवाली है, और इसकी अपनी एक अनूठी कथा और महत्व है।

पौराणिक गाथा: शिव का विजयोत्सव

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देव दिवाली का दिन महान है क्योंकि इसी दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नामक भयंकर राक्षस का वध किया था। इस विजय से देवताओं को त्रिपुरासुर के आतंक से मुक्ति मिली थी। माना जाता है कि इसी उपलक्ष्य में, सभी देवता काशी नगरी में उतरते हैं और दीवाली का उत्सव मनाते हैं। ऐसा कहा जाता है कि इस शुभ दिन पर भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना, पवित्र गंगा में स्नान और दीप दान करने से व्यक्ति की हर मनोकामना पूरी होती है। साथ ही, यह दिन धन की देवी मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए भी अत्यंत फलदायी माना जाता है।

कब है देव दिवाली का पर्व?

हर वर्ष की भांति, देव दिवाली का यह पावन पर्व कार्तिक पूर्णिमा के शुभ दिन पर मनाया जाता है। इस वर्ष, हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि 05 नवंबर को मनाई जाएगी, और इसी दिन देव दिवाली का उत्सव मनाया जाएगा। इस विशेष दिन पर, काशी की पावन नगरी अनगिनत दीपों से जगमगा उठती है, मानो स्वर्ग के देवता स्वयं पधारकर दिवाली का आनंद ले रहे हों।

देव दिवाली का शुभ मुहूर्त: कब करें दीपदान?

इस बार देव दिवाली का मुहूर्त विशेष है। कार्तिक माह की पूर्णिमा तिथि 4 नवंबर, मंगलवार को रात 10 बजकर 36 मिनट पर आरंभ होगी और अगले दिन, 5 नवंबर, बुधवार को शाम 06 बजकर 48 मिनट पर समाप्त होगी। इस प्रकार, देव दिवाली का पर्व कल, यानी 5 नवंबर को धूमधाम से मनाया जाएगा।

दीपदान का महत्व: सकारात्मक ऊर्जा का संचार

देव दिवाली पर दीपदान का विशेष विधान है और इसे अत्यंत शुभ माना जाता है। जैसा कि ऊपर उल्लेख किया गया है, कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान शिव द्वारा त्रिपुरासुर राक्षस का वध देवताओं के लिए मुक्ति का पर्व था। इसी असीम आनंद और उत्सव में, देवताओं ने इस दिन दिवाली की तरह दीप प्रज्वलित किए थे। तभी से, कार्तिक पूर्णिमा पर दीपदान की परंपरा चली आ रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दीपदान करने से न केवल समस्त नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है, बल्कि यह घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी करता है, जिससे वातावरण शुद्ध और मंगलमय बना रहता है।


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