दिवाली: धन, समृद्धि और सकारात्मकता का पावन पर्व
हिंदू धर्म में दिवाली को एक अत्यंत शुभ और महत्वपूर्ण त्योहार के रूप में मनाया जाता है। कार्तिक मास की अमावस्या तिथि के इस पावन अवसर पर, हम विघ्नहर्ता भगवान गणेश और धन-ऐश्वर्य की देवी मां लक्ष्मी की आराधना करते हैं। यह वही दिन है जब भगवान श्रीराम, रावण का वध कर, अपने प्रिय अयोध्यावासियों के बीच वापस लौटे थे। उनके स्वागत में प्रज्वलित दीयों की यह परंपरा आज भी हमें प्रेरणा देती है। दिवाली, वास्तव में, मां लक्ष्मी के स्वागत का दिन है, जब हम चारों ओर प्रकाश फैलाकर, सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं और महालक्ष्मी से सुख-समृद्धि और संपन्नता की कामना करते हैं। इसी अमावस्या तिथि को शक्ति की देवी माँ काली की पूजा का भी विशेष महत्व है। आइए, विस्तार से जानें कि दिवाली पर लक्ष्मी पूजन कैसे किया जाता है।
लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, प्रतिवर्ष कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को दीपावली का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन घर-आँगन दीयों और रंग-बिरंगी रोशनियों से जगमगा उठते हैं। दिवाली पर भगवान गणेश और मां लक्ष्मी की पूजा का विशेष विधान है।
वर्ष 2025 में, वैदिक पंचांग के अनुसार, दीपावली पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा का शुभ मुहूर्त 20 अक्टूबर को सायं 07:08 बजे से रात्रि 08:18 बजे तक रहेगा। इस प्रकार, लक्ष्मी पूजन के लिए लगभग 1 घंटा 11 मिनट का समय उपलब्ध होगा। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, दिवाली पर लक्ष्मी पूजन के लिए सबसे उत्तम समय अमावस्या तिथि, प्रदोष काल और स्थिर लग्न का संगम काल माना जाता है।
लक्ष्मी-गणेश पूजन की विधि
दीपावली के दिन, प्रदोष वेला से लेकर रात्रि 02 बजे से शुरू होने वाली पिशाच वेला के आरंभ से पूर्व तक लक्ष्मी पूजा का विधान है। दिवाली के दिन, प्रदोष काल, जो स्थानीय सूर्यास्त के 72 मिनट पहले से लेकर 72 मिनट बाद तक की अवधि को कहा जाता है, अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। इस दिन, स्नान आदि से निवृत होकर, अपने घर के पूजा स्थल को स्वच्छ करें। तत्पश्चात, भगवान गणेश, मां लक्ष्मी, धन के अधिपति कुबेर, श्रीयंत्र और नवग्रह यंत्र को स्थापित करें। मान्यता है कि लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियाँ नई होनी चाहिए।
पूजा के दौरान, श्रद्धापूर्वक नैवेद्य (मिठाई या फल) अर्पित करें तथा कमल पुष्प और आंवले का भोग लगाएं। मां लक्ष्मी को प्रिय श्रृंगार का सामान, रोली, हल्दी, लाल चंदन, लौंग, अक्षत, इलायची, पान, सुपारी, मौसमी फल, शहद, विभिन्न प्रकार की मिठाइयाँ, नारियल, गंगाजल और कलश जैसी सामग्री पूजा स्थल पर अपने साथ रखें। तत्पश्चात, विधि-विधान से मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करें। पूजा के साथ-साथ, मां लक्ष्मी के इस विशेष मंत्र का जाप करें: “ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः।”
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