इस वर्ष छह दिनों का होगा दीपावली का महापर्व: 18 से 23 अक्टूबर तक उत्सव का उल्लास
हिंदू धर्म का सबसे पावन और उल्लासपूर्ण पर्व, दीपावली, इस बार पांच की बजाय छह दिनों का आनंद लेकर आ रहा है। यह पवित्र महापर्व कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है, जो इस वर्ष 18 अक्टूबर से शुरू होकर 23 अक्टूबर तक चलेगा। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन भगवान श्री राम 14 वर्षों के वनवास और लंका पर विजय प्राप्त कर अयोध्या लौटे थे। उनके आगमन की खुशी में समस्त अयोध्यावासियों ने दीप जलाकर उत्सव मनाया था, और तभी से यह परंपरा चली आ रही है।
पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान, जयपुर-जोधपुर के निदेशक, ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास के अनुसार, इस वर्ष दीपावली महापर्व का शुभारंभ 18 अक्टूबर को धनतेरस के साथ होगा। इसके बाद, 19 अक्टूबर को हनुमान जयंती, छोटी दीपावली या रूप चौदस, 20 अक्टूबर को दीपावली, 21 अक्टूबर को स्नान पूजा और दान अमावस्या, 22 अक्टूबर को अन्नकूट व गोवर्धन पूजा, और अंत में 23 अक्टूबर को भैयादूज के साथ इस भव्य उत्सव का समापन होगा।
यह पावन पर्व कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को धन के अधिष्ठाता कुबेर के पूजन से प्रारंभ होकर, मृत्यु के देवता यमराज के लिए दीपदान तक चलेगा। दीपावली के दिन लक्ष्मी पूजा का विशेष महत्व है, जहाँ शाम और रात के शुभ मुहूर्त में मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और माता सरस्वती की आराधना की जाती है। धनतेरस को दीपावली का पहला दिन माना जाता है, जिसके बाद नरक चतुर्दशी, दीपावली, गोवर्धन पूजा और अंत में भैयादूज का त्योहार मनाया जाता है।
छह दिनों का दीपोत्सव: विस्तृत पंचांग
ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने इस वर्ष के छह दिवसीय दीपोत्सव का विस्तृत विवरण इस प्रकार दिया है:
- 18 अक्टूबर: धनतेरस (धन-त्रयोदशी) – इस दिन सायंकाल यम-दीपदान के साथ उत्सव का शुभारंभ।
- 19 अक्टूबर: रूप चतुर्दशी – नरक चतुर्दशी, जिसे छोटी दीपावली के नाम से भी जाना जाता है।
- 20 अक्टूबर: दीपावली – महालक्ष्मी और गणेश पूजन का शुभ दिन।
- 21 अक्टूबर: स्नान पूजा और दान अमावस्या – पवित्र स्नान और दान-पुण्य का दिन।
- 22 अक्टूबर: अन्नकूट, गोवर्धन पूजा – भगवान कृष्ण को समर्पित अन्नकूट और गोवर्धन पर्वत की पूजा।
- 23 अक्टूबर: भाई दूज – बहनों द्वारा भाइयों की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए मनाया जाने वाला पर्व।
18 अक्टूबर को धनतेरस पर दीपदान की होगी शुरुआत
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्लेषक डा. अनीष व्यास बताते हैं कि धनतेरस, जिसे धन त्रयोदशी और धन्वंतरि जयंती भी कहा जाता है, पांच दिवसीय दीपावली का पहला दिन होता है। इस दिन से ही दीपावली के उत्सव का आरंभ होता है। मान्यता है कि इसी तिथि पर आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसी कारण धनतेरस पर बर्तन खरीदने की परंपरा है, क्योंकि यह माना जाता है कि इस दिन की गई खरीदारी तेरह गुना वृद्धि लाती है। इस दिन से ही मृत्यु के देवता यमराज के लिए दीपदान की शुरुआत होती है, जो पांच दिनों तक चलता है।
- त्रयोदशी तिथि प्रारम्भ: 18 अक्टूबर 2025 को दोपहर 12:18 बजे से
- त्रयोदशी तिथि समाप्त: 19 अक्टूबर 2025 को दोपहर 1:51 बजे तक
19 अक्टूबर को रूप चतुर्दशी पर महिलाएं संवारेगी रूप
डा. अनीष व्यास के अनुसार, चतुर्दशी तिथि को भगवान विष्णु ने निशाचर नरकासुर का वध कर 16 हजार कन्याओं को मुक्ति दिलाई थी। इस दिन को शारीरिक सज्जा और अलंकार का दिन भी माना जाता है, इसीलिए इसे ‘रूप चतुर्दशी’ भी कहते हैं। इस दिन महिलाएं ब्रह्म मुहूर्त में उबटन लगाकर स्नान कर अपना रूप निखारती हैं। नरक चतुर्दशी को नरक चौदस, रूप चौदस और छोटी दीपावली के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन यमराज की पूजा होती है और अकाल मृत्यु से मुक्ति की कामना की जाती है।
- चतुर्दशी तिथि प्रारम्भ: 19 अक्टूबर 2025 को दोपहर 01:51 बजे से
- चतुर्दशी तिथि समाप्त: 20 अक्टूबर 2025 को दोपहर 03:44 बजे तक
20 अक्टूबर को दीपावली पर होगी महालक्ष्मी-गणेश पूजन
कुण्डली विश्लेषक डा. अनीष व्यास बताते हैं कि दीपावली के दिन घरों को रोशनियों से सजाया जाता है। शाम को शुभ मुहूर्त में माता लक्ष्मी, भगवान गणेश, मां सरस्वती और धन के देवता कुबेर की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस रात माता लक्ष्मी पृथ्वी पर विचरण करती हैं और स्वच्छ और विधिवत पूजन करने वाले घरों पर अपनी कृपा बरसाती हैं। इस दिन सुख-समृद्धि और भौतिक सुखों की प्राप्ति के लिए मां लक्ष्मी की विशेष आराधना की जाती है।
- कार्तिक अमावस्या तिथि प्रारम्भ: 20 अक्टूबर दोपहर 3:45 बजे से
- कार्तिक अमावस्या तिथि समाप्ति: 21 अक्टूबर को शाम 5:55 बजे तक
21 अक्टूबर को स्नान पूजा और दान अमावस्या
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्लेषक डा. अनीष व्यास के अनुसार, परंपरा में दीपोत्सव के अगले दिन कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा पर गोवर्धन पूजा होती है। किंतु इस वर्ष 21 अक्टूबर को सुबह से दोपहर तक अमावस्या तिथि होने के कारण, पूरे दिन अमावस्या मानी जाएगी और गोवर्धन पूजा अगले दिन होगी।
22 अक्टूबर को गोवर्धन पूजा पर बंटेगा अन्नकूट
डा. अनीष व्यास बताते हैं कि गोवर्धन पूजा को ‘अन्नकूट’ भी कहा जाता है। इस पर्व पर भगवान कृष्ण के साथ गोवर्धन पर्वत और गायों की पूजा की जाती है। इस दिन भगवान कृष्ण को छप्पन भोग का नैवेद्य अर्पित किया जाता है। यह भगवान विष्णु की राजा बली पर विजय का भी उत्सव है। शहर में विभिन्न स्थानों पर नवधान्यों से बने पर्वत शिखरों का भोग ‘अन्नकूट प्रसाद’ के रूप में वितरित किया जाएगा।
23 अक्टूबर को भाईदूज पर भाई करेंगे बहनों के घर भोजन
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्लेषक डा. अनीष व्यास के अनुसार, भाई दूज दीपावली पर्व का अंतिम दिन है। यह कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाकर उनकी लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। इस पर्व को भाई दूज, भैया दूज, भाई टीका, यम द्वितीया, भ्रातृ द्वितीया जैसे विभिन्न नामों से जाना जाता है। भविष्य पुराण के अनुसार, यमुना ने इसी दिन अपने भाई यम को अपने घर भोजन के लिए आमंत्रित किया था, और इसी कारण आज भी समझदार लोग इस दिन मध्याह्न का भोजन घर पर नहीं करते, बल्कि अपनी बहन के घर स्नेहवश भोजन करते हैं।
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