दीवाली पर ईशान कोण में बनाएं पूजा स्थल, चमक उठेगी किस्मत!

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Vastu Tips: ईशान कोण में बनाएं Puja स्थल, Diwali पर वास्तु नियमों से दूर होगी नकारात्मक ऊर्जा

आज देशभर में दिवाली का पावन पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इस खास दिन पर वास्तु के कुछ बेहद असरदार उपायों को अपनाकर आप अपने घर के कोने-कोने से नकारात्मक ऊर्जा को हमेशा के लिए दूर कर सकते हैं। इन उपायों को करने से आपके घर में सुख, समृद्धि और मां लक्ष्मी की असीम कृपा का वास होगा।

दिवाली की सुबह की शुरुआत करते ही सबसे पहले अपने घर के मुख्य द्वार को अच्छी तरह साफ कर लें। इसके बाद, घर की दहलीज के ठीक बाहर चूने से एक सीधी और साफ रेखा जरूर खींचें। यह रेखा एक दिव्य सुरक्षा कवच की तरह काम करती है, जो नकारात्मक ऊर्जा को आपके घर की चौखट लांघने से रोकती है।

अब मुख्य द्वार पर चावल के लेप या आलता से घर के अंदर की तरफ आती हुई मां लक्ष्मी की चरण पादुकाएं बनाएं।

इसके साथ ही, प्रवेश द्वार पर आध्यात्मिक पवित्रता बनाए रखने के लिए जूते-चप्पल के स्टैंड या कूड़ेदान को वहां से हटा दें और नेमप्लेट को अच्छी तरह चमका लें। इस बात का विशेष ध्यान रखें कि आपका मुख्य दरवाजा बिना किसी रुकावट के पूरा खुल सके। दरवाजे पर ताजे आम के पत्तों या गेंदे के फूलों का तोरण सजाएं। घर के मुख्य द्वार पर वास्तु दोषों को दूर करने और सकारात्मक ऊर्जा का स्वागत करने के लिए नेमप्लेट के पास कुमकुम से ‘श्री’ और द्वार के दोनों तरफ ‘शुभ-लाभ’ जरूर लिखें।

सजावट से जगाएं सकारात्मक ऊर्जा

अपने पूजा स्थल को घर के उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) हिस्से में स्थापित करें। पूजा करते समय आपका मुख पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमाओं को फर्श से थोड़ा ऊपर, एक साफ वस्त्र से ढकी हुई चौकी पर विराजित करें। यदि जगह की कमी या फ्लैट के वास्तु लेआउट के कारण घर के उत्तर-पूर्व में पूजा स्थान बनाना संभव न हो, तो घर का पूर्वी या उत्तरी भाग इसके लिए सबसे बेहतरीन विकल्प है। आप चाहें तो लिविंग रूम के उत्तर-पूर्व कोने में एक शेल्फ लगाकर भी अपना पूजा स्थल तैयार कर सकते हैं।

शुभ रंग लाएंगे पवित्रता

पूजा स्थल में रंगों का सही चयन वातावरण में आध्यात्मिक तरंगें घोलने का काम करता है। मंदिर की पृष्ठभूमि (बैकग्राउंड) में क्रीम, आइवरी या हल्के पीले रंग के रेशमी कपड़े का प्रयोग करें। भगवान की चौकी पर लाल या गुलाबी रंग का रेशमी वस्त्र बिछाएं। चौकी पर अपने हाथों से कमल का चित्र बनाना भी बेहद शुभ माना जाता है।

इसके अलावा, गोमती चक्र, कौड़ियां और एक चांदी का सिक्के को लाल कपड़े में बांधकर पूजा के वक्त देवी लक्ष्मी के समक्ष रखें और पूजन के बाद इसे अपनी तिजोरी में संभालकर रख लें। महालक्ष्मी पूजन के समय पूजा की थाली में चांदी का सिक्का, साबुत धनिया, कमलगट्टा, पीली कौड़ियां, रोली और शुद्ध घी जरूर रखें।

दीपों का सही चयन लाएगा संतुलन

वैसे तो पारंपरिक रूप से विषम संख्या (जैसे 3, 5, 11 या 21) में दीये जलाना बेहद शुभ माना जाता है। पूजा स्थान पर जो दीया रखें, उसकी बाती का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। घर के हर कोने, खिड़कियों, तुलसी के पौधे और रसोई में पानी रखने के स्थान (परब) के पास भी दीपक जरूर प्रज्वलित करें। मुख्य पूजा के जिन दीयों को आप जलाएं, उनमें शुद्ध देसी घी का ही प्रयोग करें, जो पवित्रता का प्रतीक है। वहीं, मुख्य द्वार पर जलाने वाले दीयों के लिए तिल या सरसों के तेल का उपयोग करना परंपरा के अनुकूल माना गया है।

दीपक से नवग्रह

आप एक थाली में दीपक जलाकर या नौ अलग-अलग दीपक रखकर उनमें नवग्रहों से जुड़ी खास चीजें अर्पित कर सकते हैं। इसके लिए सूर्य के दीपक में थोड़ी हल्दी, चंद्रमा के दीपक में साबुत चावल, मंगल के लिए लाल मसूर की दाल और बुध के लिए तीन हरी इलायची डालें। इसी प्रकार, बृहस्पति के दीपक में गुड़ का छोटा टुकड़ा और शुक्र के दीपक में ताजी गुलाब की पंखुड़ियां रखें। वहीं, शनि के लिए दस लौंग, राहु के लिए जौ और केतु के लिए काले और सफेद तिल अर्पित करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस अचूक उपाय को करने से कुंडली में नवग्रहों की अशुभ स्थिति का प्रभाव कम होता है और ग्रह दोषों से बड़ी राहत मिलती है।


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