दशहरे पर बरते खास सावधानियां, कहीं आपकी किस्मत ना बदल जाए!
नई दिल्ली: हिंदू पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को दशहरा का पावन पर्व मनाया जाता है। यह वही दिन है जब भगवान श्रीराम ने लंकापति रावण का वध कर बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश दिया था। इस वर्ष, 2 अक्टूबर को यह पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा। दशहरा को ‘विजयदशमी’ के नाम से भी जाना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दशहरा का दिन जितना शुभ होताहोता है, उतनी ही सावधानी बरतने की भी सलाह दी जाती है, खासकर सूर्यास्त के बाद। ऐसा माना जाता है कि कुछ खास वस्तुएं और कार्य नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित कर सकते हैं, जो आपकी किस्मत पर बुरा असर डाल सकते हैं।
यहाँ उन चीजों के बारे में बताया गया है जिन्हें दशहरे के दिन या रात को छूने या करने से बचना चाहिए:
1. नकारात्मकता से भरी पुरानी चीजें
- जले हुए रावण के अवशेष: रावण को बुराई का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, रावण दहन के बाद उसके जले हुए अवशेषों या लकड़ियों को छूना या घर लाना अशुभ हो सकता है। इससे आपके घर में नकारात्मकता का संचार हो सकता है।
- अशुभ मानी जाने वाली वस्तुएं: किसी भी प्रकार की टूटी हुई या खंडित मूर्ति, गंदी या फटी हुई झाड़ू (जो दरिद्रता को आमंत्रित करती है), या बंद पड़ी घड़ी को दशहरे के दिन छूने या देखने से बचें। इन वस्तुओं को दुर्भाग्य का प्रतीक माना जाता है।
- अज्ञात सामग्री (टोना-टोटका): दशहरे की रात को कुछ लोग नकारात्मक तांत्रिक क्रियाएं करते हैं। यदि आपको रास्ते में कोई अजीब या अज्ञात सामग्री, जैसे नींबू, सिंदूर, मिट्टी के बर्तन या कोई खाद्य सामग्री रखी मिले, तो उसे न छुएं और न ही उसके ऊपर से गुजरें। ऐसी मान्यता है कि ये वस्तुएं किसी की बुरी शक्ति या रोग को दूर करने के उद्देश्य से रखी गई हो सकती हैं।
- धारदार औजारों का अनादर: दशहरे पर शस्त्र पूजा का विधान है, लेकिन यह भी माना जाता है कि इस दिन धारदार वस्तुओं जैसे चाकू, छुरी या लोहे के औजारों का अनादर नहीं करना चाहिए। इनका प्रयोग केवल आवश्यक कार्यों के लिए ही करें। यदि ये धारदार वस्तुएं बिना काम के खुली रखी हों, तो उन्हें तुरंत ढक दें।
दशहरे पर ये काम करने से भी बचें:
- किसी का अपमान: दशहरे के दिन भूलकर भी किसी व्यक्ति का अपमान न करें, विशेषकर महिलाओं का। देवी दुर्गा की पूजा के इस पवित्र दिन पर महिलाओं का अपमान करना अत्यंत अशुभ माना जाता है।
- मांसाहार और मदिरा सेवन: यह पर्व सात्विक पूजा और विजय का प्रतीक है। इस दिन मांसाहार या मदिरा का सेवन करना अशुभ माना जाता है और यह आध्यात्मिक ऊर्जा को नष्ट करता है।
- शोक या क्रोध: इस दिन शोक मनाना या अत्यधिक क्रोधित होना अशुभ फल देता है। यह दिन खुशी और उत्साह से भरा होना चाहिए।
इन बातों का ध्यान रखने से आप नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षित रह सकते हैं और विजयदशमी की सकारात्मक ऊर्जा का भरपूर लाभ उठा सकते हैं।
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