कजरी तीज 2026: चंद्रमा की पूजा से संवरेगा आपका भाग्य, जानें पूजन विधि और विशेष महत्व।

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कजरी तीज 2026: अखंड सौभाग्य और अटूट विश्वास का महापर्व, जानें चंद्र दर्शन और अर्घ्य का विशेष महत्व

आस्था और समर्पण का पावन पर्व ‘कजरी तीज’ कल यानी 31 अगस्त 2026, सोमवार को श्रद्धाभाव के साथ मनाया जाएगा। हिंदू धर्म में इस दिन का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। कजरी तीज, जिसे ‘कजली’ या ‘सातुड़ी तीज’ के नाम से भी पुकारा जाता है, सुहागिन महिलाओं के लिए खुशियों की सौगात लेकर आता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु, सुखी वैवाहिक जीवन और संतान की समृद्धि की कामना करते हुए कठिन ‘निर्जला व्रत’ रखती हैं। इस व्रत की पूर्णता चंद्रदेव की पूजा और उन्हें अर्घ्य देने से ही मानी जाती है।

चंद्रमा को अर्घ्य देने के पीछे का आध्यात्मिक रहस्य

ज्योतिष शास्त्र की मानें तो चंद्रमा को ‘मन का कारक’ माना गया है। वे शीतलता, सौंदर्य और मानवीय भावनाओं के प्रतीक हैं। मान्यता है कि कजरी तीज पर चंद्रदेव की आराधना करने से मन को अपार शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया को महिलाएं दिनभर निराहार रहकर शाम को ‘नीमड़ी माता’ की विधि-विधान से पूजा करती हैं। इसके बाद रात को चंद्रोदय होने पर चंद्रमा के दर्शन और अर्घ्य के बाद ही व्रत का पारण किया जाता है।

वैवाहिक जीवन में घुलती है प्रेम की मिठास

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कजरी तीज पर चंद्रदेव को जल अर्पित करने से दांपत्य जीवन में मधुरता और सामंजस्य बना रहता है। चूंकि चंद्रमा भावनाओं को नियंत्रित करते हैं, इसलिए उनकी पूजा पति-पत्नी के बीच भावनात्मक जुड़ाव को और अधिक गहरा बनाती है। ऐसा विश्वास है कि चंद्रदेव की कृपा से परिवार में सुख-शांति का वास होता है और वैवाहिक जीवन के तनाव दूर होते हैं। यही कारण है कि सुहागिनें अखंड सौभाग्य की कामना के साथ चंद्रमा की विशेष वंदना करती हैं।

चंद्रमा को अर्घ्य देने की सही विधि

कजरी तीज की रात जब आकाश में चंद्रमा के दर्शन हों, तब एक लोटे में शुद्ध जल लें। इसमें थोड़ा कच्चा दूध, रोली, अक्षत (चावल) और दूर्वा मिला लें। अब चंद्रमा की ओर मुख करके पूरी श्रद्धा के साथ जल की धार अर्पित करें।

अर्घ्य देते समय मन ही मन चंद्रदेव का स्मरण करें और अपनी मनोकामना कहें। इसके पश्चात चंद्रमा के मंत्रों का जाप करते हुए पति की लंबी उम्र और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करें। हालांकि, देश के अलग-अलग हिस्सों में इस व्रत की स्थानीय परंपराएं अलग हो सकती हैं, लेकिन यदि आपके परिवार में चंद्रमा को अर्घ्य देने का रिवाज है, तो इस विधि का पालन करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।


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