नवरात्रि का पावन पर्व: मां दुर्गा के ‘खोइछा’ का अनूठा महत्व
नई दिल्ली: शारदीय नवरात्रि का उत्सव पूरे भक्ति-भाव से मनाया जा रहा है। इन नौ दिनों में भक्त माता रानी के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर रहे हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, आश्विन माह में मां दुर्गा, जो माता पार्वती का ही एक रूप हैं, अपने पीहर (मायके) आती हैं। कहा जाता है कि इन दिनों वे कैलाश पर्वत छोड़कर अपने बच्चों के साथ पृथ्वी पर आती हैं।
नवरात्रि के अनुष्ठानों के पश्चात माता का विसर्जन किया जाता है, और मान्यता है कि तब वे अपने ससुराल, यानी कैलाश लौट जाती हैं। सनातन धर्म की परंपराओं के अनुसार, जब कोई बेटी मायके से विदा होती है, तो उसे ‘खोइछा’ (आंचल में कुछ विशेष वस्तुएं देना) दिया जाता है।
ठीक इसी प्रकार, जब माता रानी अपने मायके से विदा होकर लौटती हैं, तो महिलाएं उनका खोइछा भरती हैं। शारदीय नवरात्रि केवल मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा का पर्व ही नहीं है, बल्कि यह महिलाओं के लिए अपने पारिवारिक सुख-समृद्धि और सुहाग की रक्षा का भी एक विशेष अवसर है। सुहागिन महिलाएं मां दुर्गा को खोइछा भरकर अपने परिवार की खुशहाली और सुख-शांति की कामना करती हैं। यह सदियों पुरानी परंपरा है और इसे अत्यंत शुभ माना जाता है।
यह अनुष्ठान न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि सामाजिक और पारिवारिक सौहार्द को भी मजबूत करता है। हर वर्ष नवरात्रि के दौरान, खोइछा भरने के लिए एक विशेष दिन और शुभ मुहूर्त निर्धारित किया जाता है।
खोइछा भरने का दिन और शुभ मुहूर्त (2025)
इस वर्ष खोइछा भरने का शुभ दिन 30 सितंबर 2025, मंगलवार है। शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं:
- प्रातः मुहूर्त: 6:15 बजे से 7:25 बजे तक
- द्वितीय अर्ध प्रहर: 9:15 बजे से 11:59 बजे तक (यह सबसे उत्तम मुहूर्त माना जाता है)
- वैकल्पिक समय: दोपहर 1:54 बजे तक किसी भी समय
यह विशेष मुहूर्त मां दुर्गा के खोइछा भरने के लिए अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है।
नवरात्रि की महत्वपूर्ण तिथियां (2025)
- नवरात्रि की शुरुआत: 22 सितंबर 2025
- महाअष्टमी: 30 सितंबर 2025
- महानवमी: 1 अक्टूबर 2025
- दशहरा/समापन: 2 अक्टूबर 2025
नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है, और प्रत्येक दिन का अपना विशेष महत्व होता है।
खोइछा भरने का महत्व
सनातन परंपरा में खोइछा भरना शुभता का प्रतीक है। इसे भरने से परिवार में सुख-समृद्धि आती है और सुहागिन महिलाओं के सौभाग्य की रक्षा होती है। खोइछा भरते समय महिलाएं नम आँखों से संसार के कल्याण और अपने परिवार की भलाई की कामना करती हैं।
खोइछा भरने की आवश्यक सामग्री
खोइछा भरने के लिए महिलाएं निम्नलिखित सामग्री का उपयोग करती हैं:
- अरवा चावल
- पांच सुपारी
- पांच पान
- श्रृंगार का सामान (जैसे चूड़ी, सिंदूर, बिंदी, मेहंदी आदि)
- हल्दी की गांठ
- दूर्वा
- पैसा
- मिठाई और बताशा
- वस्त्र
ये सभी वस्तुएं मां दुर्गा के खोइछा में डालकर महिलाएं अपने परिवार और समाज की भलाई के लिए प्रार्थना करती हैं।
अस्वीकरण: हम अंधविश्वास को बढ़ावा नहीं देते हैं। इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य सूचना और धार्मिक परंपरा को ध्यान में रखते हुए प्रस्तुत की गई है। कृपया व्यक्तिगत पूजा, मुहूर्त या अन्य आधिकारिक कार्यों के लिए संबंधित धार्मिक स्रोतों की पुष्टि अवश्य करें।
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