मोहिनी एकादशी 2026: जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इस पावन व्रत का धार्मिक महत्व।

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मोहिनी एकादशी 2026: मोह-माया के बंधन तोड़ेंगे श्रीहरि, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की पावन तिथि को मनाई जाने वाली मोहिनी एकादशी हिंदू धर्म में विशेष श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है। यह व्रत जगत के पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित है, जिसमें भक्त उनके मनमोहक ‘मोहिनी’ स्वरूप की वंदना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से पूजन करने पर साधक के समस्त पापों और कष्टों का अंत होता है, साथ ही उसे सांसारिक मोह-माया के बंधनों से मुक्ति प्राप्त होती है। आइए जानते हैं वर्ष 2026 में मोहिनी एकादशी की तिथि और इसके विशेष मुहूर्त।

कब है मोहिनी एकादशी 2026?

हिंदू पंचांग की गणना के अनुसार, मोहिनी एकादशी तिथि का शुभारंभ 26 अप्रैल, रविवार को शाम 6 बजकर 8 मिनट पर होगा, जो अगले दिन 27 अप्रैल, सोमवार को शाम 6 बजकर 17 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि की मान्यता के चलते, मोहिनी एकादशी का व्रत 27 अप्रैल को रखा जाएगा। व्रत का पारण 28 अप्रैल, मंगलवार को सुबह 5 बजकर 38 मिनट से लेकर 8 बजकर 17 मिनट के बीच करना शुभ होगा।

मोहिनी एकादशी 2026: शुभ मुहूर्त

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:12 से 4:55 तक
  • अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:49 से दोपहर 12:42 तक
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 2:28 से 3:21 तक
  • अमृत काल: दोपहर 2:41 से शाम 4:20 तक

व्रत का दिव्य महत्व

पौराणिक कथाओं के अनुसार, मोहिनी एकादशी के दिन ही भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण कर देवताओं को ‘अमृत पान’ कराया था। इस पावन अवसर पर श्री हरि के साथ माता लक्ष्मी की आराधना करने से आर्थिक संकटों का नाश होता है और जीवन सुख-समृद्धि से भर जाता है। इस दिन अन्न, वस्त्र और गुड़ का दान दरिद्रता को दूर करने वाला माना गया है।

मोहिनी एकादशी पूजन विधि

  1. पवित्र स्नान: ब्रह्म मुहूर्त में जागकर घर की शुद्धि करें और जल में तिल मिलाकर स्नान करें।
  2. स्थापना: पूजा स्थल पर लकड़ी की चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें।
  3. अर्पण: श्री हरि को पीला चंदन, अक्षत, पीले पुष्प और विशेष रूप से तुलसी दल अर्पित करें।
  4. भोग: भगवान को पंचामृत और पीले रंग की मिठाइयों का नैवेद्य लगाएं।
  5. कथा: श्रद्धापूर्वक मोहिनी एकादशी व्रत कथा का पाठ या श्रवण करें।
  6. आरती व वितरण: अंत में घी के दीपक से आरती करें और भक्तों में प्रसाद वितरित करें।


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