मोक्षदा एकादशी: मुक्ति का द्वार, 1 दिसंबर को करें व्रत
हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का अपना एक विशेष स्थान है, और हर एकादशी का अपना महत्व है। मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष में आने वाली एकादशी को ‘मोक्षदा एकादशी’ के नाम से जाना जाता है। इस वर्ष यह पावन अवसर 1 दिसंबर को पड़ रहा है, जो इसे और भी शुभ बना रहा है क्योंकि यह गुरुवार के दिन भी है, इसलिए इसे ‘गुरुवार एकादशी’ भी कहा जाएगा। यह एकादशी अत्यंत पवित्र और शुभ फलदायिनी मानी जाती है। इस दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और अंततः मोक्ष की प्राप्ति होती है।
आइए, जानते हैं मोक्षदा एकादशी की तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजन विधि और इसके महत्व के बारे में।
तिथि और शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का प्रारंभ 30 नवंबर की रात्रि 09:29 बजे से हो चुका है। यह तिथि 01 दिसंबर की शाम 07:01 बजे तक रहेगी। उदयातिथि के अनुसार, मोक्षदा एकादशी का व्रत 01 दिसंबर को ही रखा जाएगा।
पूजन विधि
मोक्षदा एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं। इसके बाद पूजा स्थल को स्वच्छ करें। एक चौकी पर पीला वस्त्र बिछाकर भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें। भगवान विष्णु का जलाभिषेक और पंचामृत से स्नान कराएं। इसके बाद उन्हें फूल, माला, पीला चंदन, गंध और अक्षत अर्पित करें। फल, मिठाई और भोग का नैवेद्य लगाएं और पुनः जल चढ़ाएं। अंत में धूप-दीप प्रज्वलित कर भगवान विष्णु के मंत्र, चालीसा और मोक्षदा एकादशी की व्रत कथा का पाठ करें। आरती के पश्चात, पूजा में हुई किसी भी त्रुटि के लिए क्षमा याचना करें।
शुभ मंत्र
- ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
- ॐ नमो नारायणाय
- ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णु प्रचोदयात्।
- शांताकारं भुजंगशयनं पद्मनाभं सुरेशं, विश्वाधारं गगन सदृशं मेघवर्णं शुभांगम्।
लक्ष्मीकांतं कमल नयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं, वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्।
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