रहस्यमयी धारी देवी: यहाँ दिन में तीन बार अपना रूप बदलती हैं ‘उत्तराखंड की रक्षक’ मां काली!

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Pauri Garhwal के Dhari Devi Temple में दिन में तीन बार स्वरूप बदलती है मां काली की प्रतिमा

दिन में तीन बार रूप बदलती हैं ‘धारी देवी’, जिनके दर्शन बिना अधूरी है चार धाम की यात्रा!

देवभूमि उत्तराखंड की पावन वादियों में अलकनंदा नदी के तट पर एक ऐसा चमत्कारिक मंदिर स्थित है, जिसकी महिमा सुनकर आप दंग रह जाएंगे। मां काली को समर्पित ‘धारी देवी मंदिर’ न केवल स्थानीय लोगों की आस्था का केंद्र है, बल्कि पूरे भारत में अपनी अलौकिक शक्तियों के लिए प्रसिद्ध हो रहा है। इस मंदिर को ‘चार धाम का रक्षक’ भी कहा जाता है। आइए, इस लेख के जरिए आपको धारी देवी मंदिर से जुड़ी उन रोचक और रहस्यमयी बातों से रूबरू कराते हैं, जो आपको हैरत में डाल देंगी।

कहां स्थित है यह रहस्यमयी मंदिर?

उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में श्रीनगर और रुद्रप्रयाग के बीच कलियासौड़ नामक स्थान पर, अलकनंदा नदी के किनारे धारी देवी का यह प्राचीन मंदिर विराजमान है। धारी माता को ‘देवी कालीसौड़’ के नाम से भी पूजा जाता है। मां का आशीर्वाद पाने के लिए भक्त दुर्गम रास्तों को पार कर यहां पहुंचते हैं। मंदिर के समीप ही एक अति प्राचीन गुफा भी मौजूद है, जो इसकी दिव्यता को और बढ़ाती है।

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अद्भुत चमत्कार: दिन में तीन बार स्वरूप बदलती है मूर्ति

इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता माता की प्रतिमा का निरंतर बदलता स्वरूप है। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं का अटूट विश्वास है कि धारी देवी की मूर्ति दिन में तीन बार अपना रूप बदलती है। सुबह के समय प्रतिमा एक नन्ही ‘बालिका’ की तरह नजर आती है, दोपहर में वह एक ‘युवती’ (महिला) के रूप में दिखाई देती है और शाम ढलते ही मां का स्वरूप एक ‘वृद्ध महिला’ जैसा हो जाता है।

क्यों है इस मंदिर की इतनी अधिक मान्यता?

पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार भीषण बाढ़ में यह मंदिर बह गया था और माता की मूर्ति बहते हुए धारो गांव के पास एक चट्टान से टकराकर रुक गई। कहा जाता है कि उस समय ग्रामीणों को मूर्ति से विलाप की आवाज सुनाई दी, जिसने उन्हें मूर्ति को वहीं स्थापित करने का निर्देश दिया। इसके बाद गांव वालों ने मिलकर धारी माता की मूर्ति को उसी स्थान पर प्रतिष्ठित किया।

एक अन्य खौफनाक घटना साल 2013 की केदारनाथ त्रासदी से जुड़ी है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, जलप्रलय से ठीक पहले एक परियोजना के चलते धारी देवी की मूर्ति को उनके मूल स्थान से हटाया गया था। लोगों का मानना है कि देवी के क्रोध के कारण ही वह भीषण बाढ़ आई थी। बाद में उसी स्थान पर पुनः भव्य मंदिर का निर्माण कर माता को स्थापित किया गया।

मंदिर की कुछ खास और रोचक बातें:

  • धारी देवी को ‘उत्तराखंड की रक्षक’ और चारों धामों की संरक्षक देवी के रूप में पूजा जाता है।
  • इस पावन धाम को माता के 108 शक्ति स्थलों में से एक माना जाता है।
  • हैरान करने वाली बात यह है कि यहां मूर्ति का केवल ऊपरी आधा भाग ही मौजूद है, जबकि मूर्ति का निचला हिस्सा रुद्रप्रयाग के ‘कालीमठ’ में पूजा जाता है।
  • माना जाता है कि धारी देवी के दर्शन किए बिना चार धाम की यात्रा का पुण्य फल प्राप्त नहीं होता और यात्रा अधूरी मानी जाती है।
  • प्रतिवर्ष नवरात्रि के शुभ अवसर पर देवी कालीसौड़ की विशेष आराधना और भव्य पूजा का आयोजन किया जाता है।


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