शारदीय नवरात्रि 2026: मां सरस्वती की कृपा पाने का महापर्व! जानें आवाहन से प्रधान पूजा तक की हर सटीक घड़ी
शारदीय नवरात्रि के पावन नौ दिनों में जहां शक्ति के नौ रूपों की उपासना होती है, वहीं ज्ञान, कला और संगीत की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती की विशेष पूजा का भी विधान है। साल 2026 में मां शारदा की यह आराधना अत्यंत शुभ संयोग लेकर आ रही है। यदि आप भी अपनी बुद्धि और कौशल को धार देना चाहते हैं, तो मां सरस्वती के आवाहन से लेकर प्रधान पूजा तक के समय का विशेष ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है।
मां सरस्वती पूजा 2026: तिथियों का शुभ संगम
नवरात्रि के अंतिम दिनों में मां सरस्वती की विशेष पूजा की परंपरा सदियों पुरानी है। साल 2026 में यह अनुष्ठान सप्तमी तिथि से शुरू होकर महानवमी तक भक्तिभाव के साथ संपन्न किया जाएगा। इस दौरान मां की उपासना के प्रमुख चरण इस प्रकार रहेंगे:
- सरस्वती आवाहन: पूजा की दिव्य शुरुआत मां के आवाहन से होती है। शास्त्रों के अनुसार, यह प्रक्रिया ‘मूल’ नक्षत्र के दौरान की जाती है। भक्त इस दिन अत्यंत श्रद्धा के साथ मां को अपने घर, शिक्षण संस्थानों और हृदय में विराजने का सादर निमंत्रण देते हैं।
- सरस्वती प्रधान पूजा: आवाहन के अगले दिन ‘पूर्वाषाढ़ा’ नक्षत्र के शुभ संयोग में मां की मुख्य पूजा संपन्न की जाती है। इस दिन विद्यार्थी अपनी पुस्तकों और कलाकार अपने वाद्य यंत्रों व कलाकृतियों को मां के चरणों में समर्पित कर उनका आशीर्वाद मांगते हैं।
- बलिदान और विसर्जन: ‘उत्तराषाढ़ा’ नक्षत्र में महानवमी के दिन विशेष आहुति और पूजा का समापन किया जाता है, जिसके पश्चात ‘श्रवण’ नक्षत्र में मां की प्रतिमा का विसर्जन कर उन्हें भावभीनी विदाई दी जाती है।
क्यों खास है नवरात्रि में मां सरस्वती की पूजा?
मान्यता है कि नवरात्रि के दौरान जब हम मां दुर्गा की प्रचंड शक्ति की आराधना करते हैं, तो उस शक्ति के सही दिशा में उपयोग के लिए विवेक और ज्ञान की आवश्यकता होती है। यही विवेक मां सरस्वती प्रदान करती हैं। दक्षिण भारत से लेकर उत्तर भारत तक, इस पूजा का सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व सर्वोपरि है। विशेषकर विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और कला जगत से जुड़े लोगों के लिए यह समय किसी वरदान से कम नहीं होता।
शुभ मुहूर्त का महत्व
हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, सही नक्षत्र और सटीक घड़ी में की गई पूजा ही साधक को पूर्ण फल प्रदान करती है। साल 2026 की शारदीय नवरात्रि में मां सरस्वती का आवाहन और पूजन उन विशेष नक्षत्रों में पड़ रहा है, जो बौद्धिक उन्नति के लिए सर्वश्रेष्ठ माने गए हैं।
तो इस नवरात्रि, श्वेत वस्त्र धारण कर और हाथों में वीणा-पुस्तक धारण करने वाली मां शारदा के स्वागत की तैयारी अभी से शुरू कर दें। मां सरस्वती का आगमन आपके जीवन को ज्ञान, शांति और सफलता के प्रकाश से आलोकित करने के लिए तैयार है।
Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates
Subscribe to get the latest posts sent to your email.


